क्या राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे साथ आएंगे? MNS ने गठबंधन के लिए रखी साफ शर्त

मनसे का साफ शब्दों में जवाब: गठबंधन तभी, जब प्रस्ताव पक्का हो!-क्या मनसे और शिवसेना (उद्धव गुट) साथ आएँगे? यह सवाल इन दिनों हर किसी के ज़ेहन में है। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इस पर अपनी बात साफ शब्दों में कह दी है – गठबंधन की बात तभी, जब उद्धव ठाकरे की पार्टी की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव आए।
पुरानी बातों का हिसाब-देशपांडे ने बताया कि 2014 और 2017 में भी मनसे ने गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन हर बार धोखा मिला। इसलिए अब मनसे किसी भी प्रस्ताव को गंभीरता से लेने से पहले अच्छी तरह से विचार करेगी। राज ठाकरे सिर्फ़ संभावना जता रहे हैं, सहमति नहीं दी है। जल्दबाज़ी में कोई फैसला नहीं होगा।
शिंदे गुट से कोई संपर्क नहीं-मनसे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से भी अभी तक कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। यानी फिलहाल मनसे किसी भी गुट के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत नहीं कर रही है।
क्या ‘मराठी मानूस’ फिर जोड़ेगा?-हाल के कुछ बयानों से लग रहा है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ‘मराठी मानूस’ के हित में फिर से साथ आ सकते हैं। लगभग 20 साल पहले अलग हुए ये दोनों नेता अब स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एक बार फिर एक साथ आने की संभावना तलाश रहे हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ़ बातें हैं या वाकई कोई ठोस फैसला होगा, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा।



