MP हाईकोर्ट को मिले 3 नए जज: ग्वालियर के दो सीनियर वकीलों को बड़ी जिम्मेदारी, जानिए कौन हैं ये चेहरे

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में तीन नए चेहरे: न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई गति!- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में तीन नए जजों की नियुक्ति से न्यायिक पद्धति में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। ग्वालियर और जबलपुर से आने वाले ये नए जज न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। आइये जानते हैं इन जजों और इस नियुक्ति के महत्व के बारे में विस्तार से।
हाईकोर्ट में जजों की संख्या हुई 35, फिर भी 18 पद खाली- तीन नई नियुक्तियों के बाद, हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है। लेकिन, कुल 53 स्वीकृत पदों में से अभी भी 18 पद खाली हैं। इससे ज़रूर पता चलता है कि न्यायिक प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। नए जजों के आने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे न्याय मिलने में लगने वाला समय कम होगा।
ग्वालियर का बढ़ा प्रतिनिधित्व: अब 5 जज हुए ग्वालियर से- इन नियुक्तियों से ग्वालियर का हाईकोर्ट में प्रतिनिधित्व और मज़बूत हुआ है। अब ग्वालियर से कुल 5 जज हाईकोर्ट में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। यह ग्वालियर के कानूनी क्षेत्र की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है और वहाँ के कानूनी विशेषज्ञों की क्षमता को उजागर करता है।
जस्टिस पवन द्विवेदी: जनहित के मुद्दों पर हमेशा आगे- 2004 में वकालत शुरू करने वाले जस्टिस पवन द्विवेदी ने कई जनहित याचिकाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खाद्य पदार्थों में मिलावट और कचरा प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों पर उनकी पैरवी काबिले तारीफ है। उनके काम से न्यायिक पद पर भी जनता की उम्मीदें बढ़ी हैं।
जस्टिस दीपक खोत: पढ़ाई में अव्वल, पेशे में सफल- 2000 में एमएलबी कॉलेज, ग्वालियर से एलएलबी में टॉप करने वाले जस्टिस दीपक खोत ने 2009 से ग्वालियर खंडपीठ में शासकीय अधिवक्ता के तौर पर काम किया है। उनका कानूनी ज्ञान और अनुभव अब न्यायिक पद पर काम आएगा और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाएगा।
जस्टिस अमित सेठ: जबलपुर खंडपीठ को मिला अनुभवी जज- जबलपुर के जस्टिस अमित सेठ उपमाधिवक्ता के तौर पर काम कर चुके हैं। उनके अनुभव और न्यायिक समझ से जबलपुर खंडपीठ को मजबूती मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार आएगा। उनका व्यापक अनुभव न्यायिक निर्णयों में सहायक होगा।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मिली मंजूरी- इन तीनों जजों के नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 9 जनवरी 2024 को सिफारिश किए थे। केंद्र सरकार ने इन सिफारिशों को मंजूरी दे दी है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और योग्यता पर आधारित है।



