क्या ट्रंप की दखल से रुका था भारत-पाक युद्ध? अमेरिका ने कोर्ट में पेश की चौंकाने वाली रिपोर्ट

ट्रम्प की मध्यस्थता: भारत-पाक युद्ध टला या नहीं?- क्या वाकई डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध टालने में अहम भूमिका निभाई? अमेरिका का दावा है कि ट्रम्प ने दोनों देशों को व्यापारिक प्रस्ताव देकर शांति समझौते में मदद की। लेकिन भारत का कहना है कि यह समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय था। आइए जानते हैं इस विवाद के दोनों पहलुओं को।
अमेरिका का दावा: व्यापार का प्रस्ताव और शांति- अमेरिकी वाणिज्य सचिव ने अदालत में बताया कि ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम किया। उन्होंने दोनों देशों को अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाने का ऑफर दिया, जिससे शांति वार्ता शुरू हुई और युद्ध टल गया। अमेरिका का कहना है कि अगर ट्रम्प की शक्तियों को कम किया गया, तो यह समझौता खतरे में पड़ सकता है और क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ सकता है।
भारत का पक्ष: द्विपक्षीय समझौता, कोई बाहरी दखल नहीं- भारत सरकार का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सीजफायर पूरी तरह से दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का नतीजा है। किसी तीसरे पक्ष की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। भले ही अमेरिका कुछ भी दावा करे, भारत का मानना है कि यह समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय था।
ऑपरेशन सिंदूर और बढ़ता तनाव- जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। दोनों देशों के बीच कई दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमले होते रहे। इस तनावपूर्ण माहौल में ही 10 मई को दोनों देश एक समझौते पर पहुँचे और शांति स्थापित हुई।
IEEPA: ट्रम्प की विदेश नीति का हथियार?- अमेरिका का कहना है कि IEEPA (इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट) राष्ट्रपति को विदेश नीति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने का अधिकार देता है। अगर इस कानून को कमजोर किया गया, तो इससे अमेरिका की विदेश नीति कमजोर होगी और दूसरे देश आक्रामक हो सकते हैं।
कोर्ट का फैसला और अमेरिका का रुख- अदालत ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ पर रोक लगा दी है, लेकिन अमेरिका का कहना है कि वह अपने रुख पर कायम है। यह पूरा मामला काफी पेचीदा है और आगे क्या होता है, यह देखना बाकी है।



