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जंग के बीच ईरान का बड़ा दांव: “पहले रास्ता खोलो, फिर न्यूक्लियर बात” — क्या बदलेगा खेल?

होर्मुज खोलने का प्रस्ताव: ईरान की शांति की पेशकश और अमेरिका के सामने बड़ा फैसला-मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और मौजूदा संघर्ष को खत्म करने की बात कही गई है। साथ ही, न्यूक्लियर बातचीत को फिलहाल टालने का सुझाव दिया गया है ताकि पहले हालात सामान्य हों। इसे एक व्यावहारिक और तत्काल राहत देने वाला कदम माना जा रहा है।

क्यों खास है यह प्रस्ताव और इसके पीछे की रणनीति-यह प्रस्ताव ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत लगभग ठप पड़ी है। दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है और कई बार टकराव के कगार पर पहुंचा है। ईरान के अंदर भी मतभेद हैं कि अमेरिका को कितनी रियायत दी जाए। इसलिए न्यूक्लियर मुद्दे को कुछ समय के लिए अलग रखकर जल्दी समझौता करने की कोशिश की जा रही है ताकि हालात और बिगड़ें नहीं।

ट्रंप की रणनीति पर हो सकता है बड़ा असर-अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है और नाकाबंदी हटाता है, तो डोनाल्ड ट्रंप के पास मौजूद दबाव का एक बड़ा हथियार कमजोर हो सकता है। अमेरिका इसी दबाव के जरिए ईरान से यूरेनियम संवर्धन रोकने और लंबी पाबंदियां लागू करने की मांग करता रहा है। इस प्रस्ताव से ट्रंप की रणनीति में बदलाव आ सकता है।

सिचुएशन रूम में बड़ी बैठक, फैसले के करीब मामला-रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के शीर्ष अधिकारियों के साथ अहम बैठक बुलाई है। इसमें ईरान के प्रस्ताव, बातचीत में आ रही रुकावट और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। अब मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि जल्द ही कोई बड़ा फैसला हो सकता है।

तेल पर दबाव जारी, अमेरिका नरम पड़ने को तैयार नहीं-ट्रंप ने साफ किया है कि वे ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि तेल निर्यात को रोकने वाली नाकाबंदी जारी रह सकती है। उनका मानना है कि कुछ हफ्तों में ईरान इस दबाव के आगे झुक सकता है। इससे पता चलता है कि अमेरिका अभी तुरंत नरमी दिखाने को तैयार नहीं है।

पाकिस्तान और ओमान के जरिए चल रही कूटनीति-ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार कई देशों से संपर्क में हैं। पाकिस्तान की यात्रा से ज्यादा नतीजा नहीं निकला, लेकिन ओमान और रूस के साथ बातचीत जारी है। यह दिखाता है कि ईरान कई रास्तों से समाधान खोज रहा है और बेहतर शर्तें बनाने की कोशिश कर रहा है।

न्यूक्लियर मुद्दे पर ईरान के अंदर मतभेद-सूत्रों के मुताबिक, ईरान के भीतर न्यूक्लियर मुद्दे पर एकमत नहीं है। कुछ नेता सख्त रुख चाहते हैं, जबकि कुछ नरमी के पक्ष में हैं। अमेरिकी मांगों में यूरेनियम संवर्धन रोकना और उसे देश से बाहर भेजना शामिल है, जिस पर सहमति बनाना आसान नहीं।

अमेरिका के सामने विकल्प और आगे की राह-अब फैसला पूरी तरह अमेरिका के हाथ में है। व्हाइट हाउस के पास ईरान का प्रस्ताव पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक स्पष्ट नहीं कि क्या निर्णय होगा। फिलहाल अमेरिका की नीति “पहले दबाव, फिर समझौता” जैसी दिख रही है। आने वाले दिनों में तय होगा कि यह प्रस्ताव शांति की ओर कदम बनेगा या तनाव बढ़ाएगा।

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