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ईरान के जख्म और खामोश होता युद्ध: अब क्या करेगा खामेनेई का ईरान?

ईरान: 12 दिन की तबाही के बाद क्या बदल गया?- 12 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद ईरान में शांति तो लौटी है, लेकिन हालात पहले जैसे नहीं रहे। देश तबाह है, और भविष्य अनिश्चित। आइए जानते हैं इस संघर्ष ने ईरान को कैसे प्रभावित किया है और आगे क्या हो सकता है।

1. टूटता ईरान: सन्नाटा और मलबा- 12 दिनों के युद्ध ने ईरान को बुरी तरह तबाह कर दिया है। इज़रायली हमलों में रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कई बड़े अधिकारी मारे गए, मिसाइलों के भंडार तबाह हो गए, और परमाणु केंद्रों को भी नुकसान हुआ। 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी सदमे में हैं और कम ही सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रहे हैं। देश में सन्नाटा और टूट-फूट की तस्वीर सामने आ रही है। यह सब देखकर ऐसा लग रहा है जैसे एक बड़ा तूफ़ान आया और चला गया हो।

 2. कमज़ोर ‘Axis of Resistance’ और चीन-रूस की चुप्पी- ईरान को उम्मीद थी कि चीन और रूस उसका साथ देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ‘Axis of Resistance’ (ईरान के समर्थक देश और समूह) को भी इज़रायल ने नुकसान पहुंचाया। पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन से जूझ रही ईरान की अर्थव्यवस्था अब और भी खराब होती जा रही है। इस चुप्पी ने ईरान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

3. अविश्वास का माहौल और वफादारी की चुनौती- इज़रायल की खुफिया एजेंसियों ने ईरान के अंदर तक घुसपैठ कर रखी है, जिससे शीर्ष सैन्य अधिकारियों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाना आसान हो गया। अब खामेनेई को अपने ही सिस्टम पर शक है और वफादारों की पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। लेकिन यह ‘शुद्धिकरण’ कौन करेगा, यह एक बड़ा सवाल है। इस अविश्वास के माहौल ने ईरान के भीतर एक गहरा दरार पैदा कर दिया है।

4. रिवॉल्यूशनरी गार्ड का पुनर्निर्माण: एक कठिन काम- ईरान के लिए रिवॉल्यूशनरी गार्ड को फिर से मजबूत बनाना एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, अनुभवी अधिकारी अभी भी मौजूद हैं। जनरल इस्माइल क़ानी, जो इस लड़ाई में बच गए, को एक सरकारी रैली में देखा गया। विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन रिवॉल्यूशनरी गार्ड को पहले जैसा बनाना आसान नहीं होगा।

 5. बदलती सुरक्षा नीति की ज़रूरत- खामेनेई की पिछले दो दशकों की सुरक्षा नीति विफल साबित हुई है। ‘Axis of Resistance’ ईरान की सीमाओं तक लड़ाई को रोकने में नाकाम रहा। अब ईरान को अपनी सुरक्षा नीति में बदलाव करने की आवश्यकता है। नई रणनीति बनाने की ज़रूरत है जो देश की सुरक्षा को मज़बूत कर सके।

 6. परमाणु बम या बातचीत? एक मुश्किल फैसला- ईरान की कमजोरियों के सामने आने के बाद, देश में परमाणु बम बनाने की मांग उठ रही है। हालांकि, अमेरिका के साथ बातचीत का विकल्प भी खुला है। यह एक बेहद मुश्किल फैसला होगा जिससे ईरान का भविष्य तय होगा।

 7. अंदरूनी संकट: बिजली, महंगाई और जनता का गुस्सा- ईरान के अंदर बिजली संकट, महंगाई और जनता का गुस्सा बढ़ रहा है। युद्ध के बाद लोग जब वापस लौटेंगे, तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं। स्टॉक मार्केट और करेंसी एक्सचेंज भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अंदरूनी तूफ़ान ईरान को और भी कमज़ोर कर सकता है।

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