फांसी की कगार पर भारतीय नर्स: क्या सुप्रीम कोर्ट बचा पाएगा निमिषा प्रिया की जान?

निमिषा प्रिया: एक भारतीय नर्स की फांसी की सजा और भारत की जद्दोजहद-14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में हत्या के आरोप में 16 जुलाई को फांसी की सजा सुनाई गई है। भारत का सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 14 जुलाई को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई निमिषा के जीवन के लिए बेहद अहम है।
‘ब्लड मनी’ से समझौता: ‘सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल’ नामक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में भारत सरकार से अपील की गई है कि वह यमन सरकार से बातचीत करे और ‘ब्लड मनी’ (खून-भरा पैसा) के जरिए पीड़ित परिवार से समझौता कराए। शरीयत कानून के अनुसार, यह समझौता निमिषा की जान बचा सकता है।
पासपोर्ट विवाद और हत्या का आरोप: 2015 में निमिषा ने यमन में एक क्लिनिक खोला था। एक यमनी नागरिक महदी के साथ विवाद के बाद, महदी ने निमिषा का पासपोर्ट जब्त कर लिया। आरोप है कि निमिषा ने अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए महदी को बेहोश करने की कोशिश की, जिससे महदी की मौत हो गई। इसी के चलते निमिषा पर हत्या का आरोप लगा।
2020 से चल रहा है कानूनी जंग: 2020 में यमन की अदालत ने निमिषा को मौत की सजा सुनाई। 2023 में यमन के सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने इस फैसले को बरकरार रखा, और 2024 में यमन के राष्ट्रपति ने फांसी की सजा पर मुहर लगा दी। अब, केवल पीड़ित परिवार की माफी ही निमिषा को फांसी से बचा सकती है।
मां की जद्दोजहद: निमिषा की मां, प्रेमा कुमारी, पिछले एक साल से यमन में हैं और पीड़ित परिवार से माफी की गुहार लगा रही हैं। वह लगातार निमिषा की जान बचाने के लिए प्रयास कर रही हैं।
विदेश मंत्रालय का सहयोग: भारत का विदेश मंत्रालय निमिषा और उनके परिवार को हर संभव मदद देने का वादा कर चुका है। लेकिन यमन में राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रयासों में मुश्किलें आ रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं सबकी नजरें: सभी की नजरें 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह सुनवाई निमिषा के जीवन के लिए आखिरी उम्मीद है।



