‘डिशोम गुरु’ शिबू सोरेन का अंतिम सफर: पूरे राज्य में शोक, आज नेमरा में होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

झारखंड के गुरुजी: शिबू सोरेन का निधन और एक युग का अंत-झारखंड के लोकप्रिय नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सह-संस्थापक, शिबू सोरेन जी का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दिल्ली के अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। ‘डिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से मशहूर सोरेन जी के निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।
अंतिम विदाई: सम्मान और श्रद्धांजलि-सोरेन जी का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को आम जनता के दर्शन के लिए झारखंड विधानसभा में रखा जाएगा ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। फिर, फूलों से सजे एक रथ में उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। सरकार ने इस दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग और राजनीतिक नेता इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे कई बड़े नेताओं के भी आने की उम्मीद है। यह एक भावुक और यादगार विदाई होगी, जिसमें हजारों समर्थक शामिल होंगे, ‘गुरुजी अमर रहें’ के नारे लगाते हुए।
झारखंड आंदोलन के सूत्रधार: एक अविस्मरणीय विरासत-शिबू सोरेन जी का जीवन झारखंड के आदिवासी आंदोलन से अटूट रूप से जुड़ा था। उन्होंने न केवल राज्य के गठन के लिए संघर्ष किया, बल्कि हमेशा गरीब और वंचितों की आवाज को बुलंद किया। 38 साल तक JMM के नेतृत्व में रहते हुए, उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला और राज्यसभा सांसद भी रहे। उनके नेतृत्व में झारखंड आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। उनका निधन झारखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी विरासत, उनके सिद्धांत और उनका संघर्ष हमेशा याद रखा जाएगा।
परिवार और समर्थकों का शोक: एक युग का अंत-सोरेन परिवार और उनके समर्थकों में गहरा शोक व्याप्त है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और भाई बसंत सोरेन अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। सोरेन जी के पार्थिव शरीर को दिल्ली से विशेष विमान से रांची लाया गया। यात्रा के दौरान हजारों समर्थकों ने ‘गुरुजी अमर रहें’ के नारे लगाए। कल्पना सोरेन जी ने भावुक होते हुए कहा, ‘सब सूना हो गया… आपकी जंग, आपका प्यार, आपके सिद्धांत – यह बेटी कभी नहीं भूलेगी।’ यह शब्द उनके प्रति समर्पण और गहरे सम्मान को दर्शाते हैं। उनके निधन से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनकी विरासत सदैव जीवित रहेगी।



