बांग्लादेशी भाषा विवाद के बीच अमित शाह की बंगाल बैठक: वोटर लिस्ट रिवीजन और आरक्षण सीटों पर बनी रणनीति

बंगाल में गरमाया सियासी पारा: बीजेपी की नज़र चुनावों पर!-पश्चिम बंगाल में भाषा को लेकर मचा घमासान, और बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर बड़ी बैठक की है! राजनीतिक गलियारों में इस वक्त सबसे ज़्यादा चर्चा इसी मुद्दे की हो रही है। आइए, जानते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला और बीजेपी की क्या है रणनीति?
भाषा विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी-हाल ही में बंगाली भाषा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है, जिससे बंगाल का राजनीतिक माहौल और भी गरम हो गया है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति का जायज़ा लिया गया और आने वाले चुनावों की तैयारियों पर भी खूब मंथन हुआ। बैठक में खास तौर पर तीन मुद्दों पर ज़ोर दिया गया: वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), आर.जी. कर अस्पताल केस की जांच और चुनावों के लिए रणनीति। दिल्ली पुलिस की एक कार्रवाई के बाद से ही बंगाली भाषा को लेकर विवाद और गहरा गया है, जिस पर विपक्षी दल बीजेपी पर लगातार हमलावर हैं। बैठक के बाद राज्य के प्रमुख कार्यकर्ताओं की एक वर्चुअल मीटिंग भी हुई, जिसमें ज़िला अध्यक्षों ने चुनावी तैयारियों पर चर्चा की।
वोटर लिस्ट में छानबीन: बीजेपी का दावा-बीजेपी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण की मांग ज़ोरदार तरीके से उठाई है। पार्टी का मानना है कि बांग्लादेश से सटे बंगाल में वोटर लिस्ट की जाँच बेहद ज़रूरी है, ताकि किसी भी तरह के फर्ज़ी वोटरों का पता लगाया जा सके। बीजेपी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस इस जाँच से बच रही है क्योंकि इससे फर्ज़ी वोटरों का खुलासा हो सकता है। बीजेपी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बिहार की तरह बंगाल में भी वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया जाए। पार्टी का कहना है कि इससे चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी होंगे।
आरक्षित सीटों पर फोकस-बीजेपी ने राज्य की 84 आरक्षित सीटों पर भी अपनी रणनीति पर चर्चा की। इनमें से 68 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 16 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। 2021 के चुनावों में बीजेपी ने इनमें से 39 सीटें जीती थीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 45 सीटें मिली थीं। बीजेपी का मानना है कि इस बार इन सीटों पर उनकी स्थिति पहले से कहीं बेहतर है और एक ठोस रणनीति से वे जीत का अंतर और बढ़ा सकते हैं। इसलिए, पार्टी ने इन सीटों पर संगठनात्मक मज़बूती और बूथ स्तर पर काम को और तेज करने का फैसला लिया है।
भाषा विवाद और आरजी कर अस्पताल कांड: चुनावी मुद्दे-बैठक में बंगाली भाषा को लेकर हुए विवाद पर भी चर्चा हुई। हालांकि, नेताओं ने इस पर ज़्यादा कुछ नहीं बताया, लेकिन पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा, आरजी कर अस्पताल में हुई दुखद घटना को भी बीजेपी चुनावी मुद्दा बनाएगी। पार्टी का मानना है कि इस घटना से राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। राज्य इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व को उन मुद्दों की एक सूची सौंपी है, जिन्हें आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाया जाएगा।



