अमेरिका की दबाव नीति बेअसर: रूस-भारत के रिश्तों में और मजबूती, ट्रंप और पुतिन की ऐतिहासिक मुलाकात तय

भारत का डटकर सामना: रूस के साथ मज़बूत रिश्ते-यह लेख भारत के रूस के साथ अपने मज़बूत संबंधों को बनाए रखने और बाहरी दबावों का डटकर सामना करने की कहानी कहता है।
अमेरिकी दबाव और भारत का जवाब-हाल ही में, अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाया और भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगाया। लेकिन, भारत ने अमेरिकी दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ सीधी बातचीत की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमति जताई। यह कदम दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति और विदेश नीति में स्वतंत्रता बनाए रखने पर दृढ़ है। भारत ने ब्राज़ील के साथ भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जो अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित देशों में से एक है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक राजनीति में अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाना चाहता है और किसी एक देश के दबाव में नहीं आना चाहता। इस कदम से भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा। यह निर्णय भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक ताकत का प्रतीक है।
ट्रम्प-पुतिन वार्ता: शांति की उम्मीदें?-अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच अलास्का में होने वाली मुलाकात ने भी काफी ध्यान खींचा है। यह बैठक यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के उद्देश्य से हो रही है, हालांकि, इस बैठक से तत्काल शांति की उम्मीदें कम हैं। इस बैठक को पुतिन के लिए एक प्रतीकात्मक जीत माना जा रहा है, क्योंकि यह वर्षों के अलगाव के बाद अमेरिका में उनकी पहली यात्रा होगी। हालांकि, यूरोप में चिंता है कि इस बैठक से यूक्रेन को किनारे किया जा सकता है। इस मुलाक़ात से पहले, पुतिन ने अपने सहयोगी देशों, जैसे चीन, दक्षिण अफ्रीका, और मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी बात की है, जो इस बात का संकेत है कि वह एक व्यापक कूटनीतिक पहल कर रहे हैं। लेकिन, पश्चिमी विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन अभी युद्ध खत्म करने में रुचि नहीं रखते हैं।
यूक्रेन युद्ध: जारी तनाव-यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जारी है, जिसमें पूर्वी डोनेट्स्क क्षेत्र में सबसे ज़्यादा लड़ाई हो रही है। यूक्रेनी कमांडरों का कहना है कि रूस से बातचीत नामुमकिन है और केवल रूस की हार ही इस युद्ध को खत्म कर सकती है। यह दर्शाता है कि युद्ध का अंत अभी दूर है और तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष वैश्विक राजनीति पर गहरा प्रभाव डाल रहा है और शांति की उम्मीदें अभी भी धुंधली हैं। यूक्रेन के दृढ़ संकल्प और रूस की आक्रामकता के बीच, स्थिति काफी जटिल बनी हुई है।
पुतिन की कूटनीति और भारत का संदेश-पुतिन की लगातार कूटनीतिक पहल और मोदी से उनकी बातचीत, खासकर अमेरिकी टैरिफ के बाद, यह साफ संदेश देती है कि भारत अपने रणनीतिक फैसलों में स्वतंत्र है और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। पुतिन का अगले महीने चीन दौरा भी रूस-चीन संबंधों को मज़बूत करने का संकेत है, जो वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहलू है।



