Chhattisgarh

एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने का खतरा, जानें क्या हैं उनकी 10 बड़ी मांगें

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल! 18 अगस्त से NHM कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर!-छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16 हजार से ज़्यादा कर्मचारी 18 अगस्त से एक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। शनिवार को उन्होंने बाकायदा इसकी औपचारिक चेतावनी जारी कर दी है और इसकी सूचना कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को भी दे दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को 15 अगस्त तक का समय दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश, इस तय समय-सीमा तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। इसी वजह से, अब वे काम बंद करने जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, जो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

 स्वास्थ्य सेवाएं हो सकती हैं बुरी तरह प्रभावित, जनता की मुश्किलें बढ़ेंगी!-एनएचएम कर्मचारियों की इस हड़ताल से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने इस बार साफ कर दिया है कि वे सिर्फ प्रशासनिक काम ही नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह से बंद रखेंगे। विशेष रूप से, एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां) भी बंद कर दी जाएंगी। इससे अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोगों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगर यह हड़ताल लंबी चली, तो आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ सकती हैं, जो कि एक गंभीर समस्या है।

 सरकार की अनदेखी पर कर्मचारी संघ का कड़ा रुख, जारी किया संयुक्त बयान!-एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी, महासचिव कौशलेश तिवारी और अन्य पदाधिकारियों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने बार-बार अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यही कारण है कि इस बार संघ ने सभी सेवाओं को ठप करने का कड़ा फैसला लिया है। उनका मानना है कि अगर सरकार अभी भी इस मामले पर ध्यान नहीं देती है, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं, जो किसी के भी हित में नहीं होगा।

संविलियन और स्थायीकरण प्रमुख मांग, कब मिलेगा कर्मचारियों को हक?-एनएचएम कर्मचारियों की सबसे बड़ी और प्रमुख मांग यह है कि उन्हें नियमित कर्मचारियों की तरह स्थायी किया जाए। वर्तमान में, कई कर्मचारी वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन स्थायीकरण की दिशा में सरकार की ओर से कोई भी पहल नहीं की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि जब वे लगातार स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं, तो उन्हें अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिलना ही चाहिए। इससे न केवल उनकी नौकरी सुरक्षित होगी, बल्कि वे मानसिक रूप से भी निश्चिंत होकर और बेहतर तरीके से अपना काम कर पाएंगे, जो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

 पब्लिक हेल्थ कैडर और ग्रेड पे को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी!-कर्मचारी लंबे समय से पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इसके अलावा, ग्रेड पे का सही निर्धारण भी उनकी प्रमुख मांगों में से एक है। फिलहाल, अलग-अलग पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों को असमान वेतन और सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे उनमें असंतोष है। संघ का यह मानना है कि एक स्पष्ट ग्रेड पे प्रणाली लागू होने से कर्मचारियों के बीच का भेदभाव खत्म होगा और उन्हें काम करने के लिए अधिक प्रेरणा भी मिलेगी, जो कि बहुत जरूरी है।

27% वेतन वृद्धि और आरक्षण की मांग, कब होगा समाधान?-कर्मचारियों का कहना है कि 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि का प्रस्ताव काफी सालों से लंबित पड़ा हुआ है। ऐसे में, जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, तो मौजूदा वेतन से अपने परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। इसके साथ ही, वे यह भी चाहते हैं कि नियमित भर्ती प्रक्रिया में एनएचएम कर्मचारियों के लिए सीटों का आरक्षण तय किया जाए। उनका तर्क है कि जब वे इतने सालों से स्वास्थ्य व्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, तो उन्हें भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए, जो कि उचित है।

 अवकाश, स्थानांतरण और चिकित्सा बीमा भी अहम मुद्दे, क्या सरकार सुनेगी?-एनएचएम कर्मचारी संघ का कहना है कि उन्हें मेडिकल और अन्य आवश्यक अवकाश की सुविधा ठीक से नहीं मिलती है। इसी तरह, स्थानांतरण नीति भी स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण कई कर्मचारी वर्षों तक एक ही स्थान पर अटके रहते हैं और उनका स्थानांतरण नहीं हो पाता। इसके अतिरिक्त, उन्होंने न्यूनतम 10 लाख रुपये के कैशलेस चिकित्सा बीमा की भी मांग रखी है। कर्मचारियों का यह तर्क है कि वे खुद दूसरों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं, लेकिन जब वे बीमार पड़ते हैं, तो उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती। यह उनके लिए वास्तव में एक बड़ी विडंबना है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button