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अनिल अंबानी के घर पर CBI की छापेमारी, 2929 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में बड़ी कार्रवाई

 अनिल अंबानी के ठिकानों पर CBI का छापा: 2929 करोड़ के लोन फ्रॉड का खुलासा!

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: मुंबई में अनिल अंबानी के घर और RCOM ऑफिस में तलाशी-शनिवार को मुंबई में एक बड़ी हलचल देखने को मिली जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (RCOM) के डायरेक्टर अनिल अंबानी के घर और कंपनी के ऑफिस पर एक साथ छापेमारी की। यह एक्शन एक ताज़ा एफआईआर के बाद लिया गया, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप काफी गंभीर हैं: कहा जा रहा है कि रिलायंस कम्युनिकेशन और अनिल अंबानी पर एसबीआई को लगभग 2929 करोड़ रुपये का चूना लगाने का इल्ज़ाम है। सीबीआई की टीमों ने सुबह से ही इन दो मुख्य जगहों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कई महत्वपूर्ण कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड्स को खंगाला गया।

‘सी विंड’ अपार्टमेंट में CBI की मौजूदगी: क्या मिले सुराग?-सीबीआई की एक टीम अनिल अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आलीशान ‘सी विंड’ अपार्टमेंट में पहुँची, जहाँ उन्होंने विस्तार से तलाशी ली। इसी दौरान, दूसरी टीम ने रिलायंस कम्युनिकेशन के ऑफिस में भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय लेन-देन और लोन से संबंधित कई अहम दस्तावेजों की बारीकी से जाँच-पड़ताल की। यह पूरी कार्रवाई कोर्ट से सर्च वारंट हासिल करने के बाद ही की गई। सीबीआई का कहना है कि अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि लोन के पैसे का गलत इस्तेमाल हुआ है और फंड्स को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया है, जो कि नियमों के खिलाफ है।

SBI की शिकायत बनी FIR का आधार: क्या है पूरा मामला?-सीबीआई ने पिछले गुरुवार को एक एफआईआर दर्ज की है, जिसमें अनिल अंबानी, रिलायंस कम्युनिकेशन, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। इस शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने एक सोची-समझी साजिश के तहत और गलत जानकारी देकर एसबीआई से लोन हासिल किया। आरोप हैं कि इस प्रक्रिया में फर्जी बिक्री इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया, कंपनियों के बीच पैसों का लेन-देन (इंटर-कंपनी ट्रांजैक्शन) हुआ और लोन की रकम को दूसरी जगह डायवर्ट किया गया। यहाँ तक कि नेटिजन इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड जैसी अपनी ही ग्रुप की कंपनियों को दिए गए कैपिटल एडवांस को भी गलत तरीके से दिखाया गया।

2020 से चल रहा है ये ‘फ्रॉड’ का खेल?-यह मामला असल में नवंबर 2020 से गरमाया हुआ है, जब एसबीआई ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशन को ‘फ्रॉड’ यानी धोखाधड़ी की श्रेणी में डाल दिया था। इसके बाद जनवरी 2021 में सीबीआई से शिकायत की गई। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने तब इस पर रोक लगा दी थी। बाद में, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया कि किसी भी कंपनी को ‘फ्रॉड’ घोषित करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। इस फैसले के बाद, 2023 में एसबीआई ने ‘फ्रॉड’ का टैग हटा भी दिया था। लेकिन, जुलाई 2024 में आरबीआई के एक नए सर्कुलर के तहत, दोबारा प्रक्रिया अपनाकर इस खाते को फिर से ‘फ्रॉड’ घोषित कर दिया गया है।

2227 करोड़ से ज़्यादा का हिसाब बाकी: बैंक का दावा-एसबीआई के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशन पर फंड-बेस्ड प्रिंसिपल अमाउंट के तौर पर 2227.64 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसके अलावा, 786.52 करोड़ रुपये की नॉन-फंड बेस्ड बैंक गारंटी भी इसमें शामिल है। यह बकाया साल 2016 से चला आ रहा है, और इसमें ब्याज और अन्य खर्चे भी जुड़ते गए हैं। बैंक का सीधा आरोप है कि इतनी बड़ी रकम बकाया होने के बावजूद, कंपनी और उसके प्रमोटरों ने बैंक को गुमराह करके भारी नुकसान पहुँचाया है।

RCOM की दिवालिया प्रक्रिया और आगे का रास्ता-फिलहाल, रिलायंस कम्युनिकेशन कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। साल 2020 में क्रेडिटर्स की कमेटी ने इसके रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी थी और इसे NCLT मुंबई में जमा भी किया गया था। लेकिन, अभी तक NCLT की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसी बीच, एसबीआई ने अनिल अंबानी के खिलाफ पर्सनल इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस भी शुरू कर दी है, जिसकी सुनवाई भी एनसीएलटी मुंबई में चल रही है।

अब आगे क्या होगा?- अब सबकी निगाहें सीबीआई की जांच पर टिकी हैं कि इसमें क्या नए खुलासे होते हैं। अगर लोन के गलत इस्तेमाल और फर्जीवाड़े के सबूत और मजबूत पाए गए, तो अनिल अंबानी की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, रिलायंस कम्युनिकेशन पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया में फंसी हुई है, ऐसे में निवेशकों और कर्जदाताओं की सारी उम्मीदें अब अदालत के फैसले पर टिकी हैं। यह पूरा मामला आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक और कॉर्पोरेट विवाद का रूप ले सकता है।

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