उज्जैन में बुलडोजर चला: महाकाल मंदिर के पास अवैध चिकन-मटन दुकानें हुईं जमींदोज

महाकाल की नगरी में चला बुलडोजर: अवैध दुकानों पर गरजा प्रशासन!-उज्जैन, धर्मनगरी में एक बार फिर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का चाबुक चला है। बाबा महाकाल के आशीर्वाद से सजी इस पवित्र नगरी में, मंदिर के आसपास के इलाकों को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान ज़ोरों पर है। इस बार निशाना बनीं वो चिकन-मटन की दुकानें, जो न सिर्फ़ नियमों को ताक पर रखकर चल रही थीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत कर रही थीं। सरकार ने साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्रों के पास ऐसी गतिविधियां कतई बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
दो हिस्सों में पसरा था अवैध कारोबार-यह पूरा मामला बेगम बाग क्षेत्र का है, जहाँ अनीसा बी की इमारत के दो हिस्सों में ये दुकानें अवैध रूप से संचालित हो रही थीं। मोहम्मद वसीम और मोहम्मद शादाब जैसे लोग इन दुकानों के संचालक थे। जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, तो हालात का जायज़ा लेने के लिए आधा दर्जन बुलडोजर और पोकलेन मशीनें तैयार थीं। इस बड़ी कार्रवाई में 50 पुलिस अधिकारी, 100 निगम कर्मी और प्रशासनिक अमला शामिल था, जिसने मिलकर अवैध ढाँचों को ज़मींदोज़ कर दिया।
हाईकोर्ट से राहत मिली नहीं, चला बुलडोजर!-दरअसल, इन अवैध दुकानों को हटाने की कोशिशें पहले भी हुई थीं, लेकिन मामला कोर्ट में होने के कारण प्रशासन को स्टे मिला हुआ था। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे की अवधि समाप्त हुई, प्रशासन ने बिल्कुल भी देर नहीं की और तुरंत एक्शन लेते हुए इन दुकानों को ध्वस्त कर दिया। यह देखना दिलचस्प है कि इसी इलाके में करीब ढाई महीने पहले भी 12 ऐसी इमारतों पर बुलडोजर चला था, जो अवैध कब्ज़ों का प्रतीक थीं। प्रशासन का मानना है कि ऐसी लगातार कार्रवाई से अवैध कब्जों पर लगाम लगेगी।
‘अंगारा रेस्टोरेंट’ भी आया जद में-सिर्फ़ छोटी-मोटी दुकानें ही नहीं, बल्कि इस बार सरकार का बुलडोजर एक चर्चित ‘अंगारा रेस्टोरेंट’ पर भी गरजा। यह रेस्टोरेंट मुस्लिम बाहुल्य इलाके में काफ़ी लोकप्रिय था और नॉनवेज खाने के शौकीनों के लिए एक खास जगह मानी जाती थी। हालांकि, कई हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई थी, उनका कहना था कि महाकाल मंदिर जैसे पवित्र स्थल के मुख्य मार्ग पर ऐसी दुकानें खोलना लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
हिंदू संगठनों की आवाज़ हुई बुलंद-इन नॉनवेज दुकानों को लेकर लंबे समय से हिंदूवादी संगठन अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे थे। उनकी मांग थी कि महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर इस तरह के व्यवसाय नहीं होने चाहिए। संगठनों ने बार-बार प्रशासन से इस मामले में सख्त कदम उठाने की अपील की थी। इस बार प्रशासन ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया और अवैध दुकानों को गिराकर एक स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक स्थलों की गरिमा सर्वोपरि है।
प्रशासन का कड़ा रुख, शहर की छवि पर ध्यान-इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एडिशनल कमिश्नर संतोष टैगोर और सीईओ यूडीए संदीप सोनी ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के आसपास किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या विवादित प्रतिष्ठान अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य शहर से अवैध कब्जों को हटाना और उज्जैन की पवित्र छवि को बनाए रखना है। यह कदम शहर के सौंदर्यीकरण और व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुहिम जारी रहेगी, स्वच्छता का संकल्प-यह ताज़ा कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन अब अवैध गतिविधियों के प्रति बिल्कुल भी ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। महाकाल मंदिर जैसे विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे कड़े कदम उठाए जाते रहेंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की मुहिम से न केवल अतिक्रमण पर अंकुश लगेगा, बल्कि शहर की व्यवस्था और सार्वजनिक स्वच्छता में भी सुधार होगा।



