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उत्तराखंड में फिर कहर: बादल फटने और मूसलाधार बारिश से तबाही, कई लोगों की मौत और दर्जनों लापता

उत्तराखंड पर कुदरत का कहर: कहीं बादल फटे, कहीं भूस्खलन, जीवन अस्त-व्यस्त

मानसून का तांडव: चार जिलों में मचा हाहाकार-इस बार उत्तराखंड में मानसून अपने साथ खुशहाली नहीं, बल्कि तबाही लेकर आया है। शुक्रवार की सुबह होते-होते, खासकर तड़के, कई जगहों पर भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने लोगों की नींदें उड़ा दीं। चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर जैसे जिलों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। मूसलाधार बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आकर कई घर मलबे में तब्दील हो गए। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। दुखद है कि अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। यह घटना 23 अगस्त को चमोली के थराली में हुई तबाही के बाद आई है, जिसने राज्य की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

लगातार आपदाओं से बढ़ी लोगों की परेशानी-पूरा मानसून सीजन ही उत्तराखंड के लिए आपदाओं का दौर रहा है। इससे पहले, 5 अगस्त को उत्तरकाशी जिले में खीर गंगा नदी में अचानक आई बाढ़ ने धाराली गांव के आधे हिस्से को बहा दिया था। यही नहीं, पास के हर्षिल इलाके में भी बाढ़ ने सेना के कैंप को भी अपनी चपेट में ले लिया था। उस समय भी लोग बाल-बाल बचकर निकले थे। उस भयावह हादसे में 69 लोग लापता हो गए थे, जिनमें हमारे बहादुर सेना के जवान, नेपाली नागरिक और बिहार व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लोग शामिल थे। इन ताज़ा घटनाओं ने राज्य के लोगों के मन में डर और अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।

बागेश्वर और चमोली में सबसे बुरा हाल-बागेश्वर जिले के कफकोट इलाके में आधी रात को हुए भूस्खलन ने कई घरों को निगल लिया। पौसरी ग्राम पंचायत में दो लोगों की जान चली गई, वहीं तीन लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। चमोली जिले के मोपाटा गांव में भी एक मकान और मवेशियों के रहने की जगह (गोठ) मलबे में दब गई। इस हादसे में एक दंपति की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हो गया। जिले में 25 से ज़्यादा पशु भी लापता हो गए हैं। इन हालातों से साफ है कि यह आपदा सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुधन के लिए भी बहुत बड़ी क्षति लेकर आई है।

रुद्रप्रयाग और टिहरी में अलर्ट जारी-रुद्रप्रयाग जिले के कई गांवों में बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। बासुकेदार और आसपास के इलाकों में तीन बार बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मकान ढह गए हैं और लोगों के मलबे में फंसे होने की खबरें आ रही हैं। स्थानीय पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि चेनागढ़ क्षेत्र में कई लोग मलबे में दब गए हैं। साथ ही, रास्ते टूटने की वजह से बचाव टीमों को वहां पहुंचने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। वहीं, टिहरी जिले के बुढ़ा केदार इलाके में एक मंदिर और मवेशियों के लिए बने शेड भी मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी आलू की फसल भी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है।

प्रशासन जुटा बचाव में, पर राहें मुश्किल-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए राहत और बचाव कार्यों को तेज़ी से करने के निर्देश दिए हैं। SDRF, NDRF और राजस्व पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचाई जा रही हैं। हालांकि, टूटी हुई सड़कें और लगातार हो रही बारिश बचाव कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है। सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों को रस्सियों के सहारे पार करते हुए दिख रहे हैं। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवज़ा और ज़रूरी सहायता पहुंचाई जाएगी।

हाईवे बंद, यात्रियों और श्रद्धालुओं को खास हिदायत-लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले कई राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में सड़कें मलबे से पूरी तरह भर गई हैं। कई यात्रियों की गाड़ियां रास्ते में फंस गई हैं। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि यात्रा शुरू करने से पहले ताज़ा जानकारी ज़रूर लें। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। वहीं, चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। सभी लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारों और पहाड़ी ढलानों से दूर रहें।

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