पंजाब में बाढ़ का कहर: 1988 के बाद सबसे बड़ा संकट, अब तक 30 लोगों की मौत

पंजाब में बाढ़ का कहर: 1988 जैसी भयावह स्थिति, जनजीवन अस्त-व्यस्त!-पंजाब इन दिनों एक विकट बाढ़ की चपेट में है, जो 1988 के बाद की सबसे गंभीर मानी जा रही है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में तबाही मचाई हुई है। हमारे प्यारे पंजाब के सभी 23 जिलों में बाढ़ का पानी घुस चुका है, जिससे हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक लगभग 30 अनमोल जानें जा चुकी हैं और साढ़े तीन लाख से भी ज़्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। प्रशासन पूरी तरह से राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन मदद की ज़रूरत बहुत ज़्यादा है।
स्कूल बंद, लोगों से सावधानी की अपील!-रूपनगर और पटियाला जैसे जिलों में तो बाढ़ का खतरा और भी बढ़ गया है, जिसके चलते प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह का जोखिम न लें और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। बच्चों और युवाओं की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए, पंजाब सरकार ने 7 सितंबर तक प्रदेश के सभी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ को बंद रखने का फैसला किया है। यह एक ज़रूरी कदम है ताकि कोई भी छात्र इस मुश्किल घड़ी में खतरे में न पड़े।
पड़ोसी राज्यों की बारिश बनी आफत की जड़!-पंजाब की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही लगातार बारिश ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। इन पहाड़ी इलाकों से निकलने वाली प्रमुख नदियाँ, जैसे सतलुज, ब्यास और रावी, पूरी तरह से उफान पर हैं। इन नदियों और अन्य जलधाराओं का अनियंत्रित पानी पंजाब के कई शहरों, गांवों और उपजाऊ खेतों को अपनी चपेट में ले रहा है। इससे न केवल लोगों का रोज़मर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, बल्कि किसानों की फसलें भी बर्बाद होने के कगार पर हैं।
भाखड़ा डैम का बढ़ता जलस्तर: गांवों पर मंडराया खतरा!-चिंता की बात यह है कि भाखड़ा डैम में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। यह अब 1,677.84 फीट तक पहुँच गया है, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 1,680 फीट है। डैम में पानी के आने की रफ़्तार (प्रवाह) 86,822 क्यूसेक है, जबकि पानी बाहर निकालने (निकासी) की रफ़्तार 65,042 क्यूसेक है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर बारिश इसी तरह जारी रही, तो पानी की निकासी को बढ़ाकर 75,000 क्यूसेक तक करना पड़ सकता है। इससे नंगल और उसके आसपास के कई गांवों के डूबने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
नेताओं का दौरा और राहत कार्यों का जायज़ा!-इस विकट परिस्थिति को देखते हुए, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। वे वहां चल रहे राहत और बचाव कार्यों का खुद जायज़ा लेंगे और बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनका हालचाल जानेंगे। इससे पहले, मनीष सिसोदिया भी तरनतारन जिले का दौरा कर चुके हैं, और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने निजी कोष से 3.25 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है।
NDRF और सेना के जवान, उम्मीद की किरण!-इस मुश्किल समय में, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF), पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन के जवान दिन-रात एक करके राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। वे नावों और हेलिकॉप्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। साथ ही, कई राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं, जहाँ बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, पानी और रहने की बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
सरकार का वादा: हर संभव मदद मिलेगी!-पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने श्री आनंदपुर साहिब के लोगों से खास अपील की है कि वे नदियों के किनारे या निचले इलाकों में न रहें, बल्कि तुरंत सुरक्षित स्थानों या सरकारी राहत शिविरों में चले जाएं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सरकार ने हर तरह की व्यवस्था कर ली है और इस मुश्किल दौर में किसी को भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। इसी तरह, पटियाला प्रशासन ने भी घग्गर नदी के किनारे बसे गांवों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है।
सड़कों और पुलों को भारी नुकसान, मरम्मत जारी!-इस विनाशकारी बाढ़ ने सड़कों और पुलों को भी काफी नुकसान पहुँचाया है। मोहाली जिले के नयागांव इलाके में पटियाला की राव पर बना एक महत्वपूर्ण रास्ता पूरी तरह से बह गया है। डिप्टी कमिश्नर कोमल मित्तल और आनंदपुर साहिब के विधायक मलविंदर सिंह ने खुद मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्यों का निरीक्षण किया है। प्रशासन का कहना है कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत का काम तेज़ी से किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द लोगों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सके।



