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रुपया 88.16 पर फिसला: भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से बड़ी उम्मीदें

 डॉलर के मुकाबले रुपया हुआ थोड़ा कमजोर, जानें क्या है वजह?

भारतीय रुपये की चाल: बाज़ार की नब्ज़ और अमेरिकी डॉलर का खेल-भारतीय रुपया गुरुवार को सुबह के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ा लड़खड़ा गया। शुरुआती कारोबार में यह 5 पैसे की गिरावट के साथ 88.16 के स्तर पर पहुँच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाज़ार की नज़रें भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत पर टिकी हुई हैं। जानकारों का मानना है कि फिलहाल रुपया 87.50 से 88.40 के बीच ही रहने की उम्मीद है, और इसकी चाल पूरी तरह से इन वार्ताओं से निकलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगी। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 88.11 पर खुला था, लेकिन कुछ ही देर में यह 88.16 तक नीचे चला गया। इससे पहले बुधवार को, रुपया अपने पिछले निचले स्तर से थोड़ा सुधरकर 4 पैसे की मजबूती के साथ 88.11 पर बंद हुआ था। पिछले कुछ दिनों से रुपया इसी दायरे में घूम रहा है और 88.20 के पार जाने में मुश्किल महसूस कर रहा है। इस स्थिति के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समय-समय पर डॉलर बेचकर बाज़ार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, ताकि रुपये को ज़्यादा गिरने से रोका जा सके।

वैश्विक संकेत और घरेलू बाज़ार का तालमेल-फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के अनुसार, भारतीय रुपया फिलहाल 87.80 से 88.30 के बीच रह सकता है। बाज़ार की चाल इस बात पर भी निर्भर कर रही है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े कैसे आते हैं और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कटौती कब करता है। इन दोनों बातों पर निवेशकों की नज़रें बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर, डॉलर इंडेक्स में 0.05% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह 97.82 पर पहुँच गया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में 0.10% की गिरावट आई है और यह 67.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। घरेलू शेयर बाज़ार में, सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 153 अंक चढ़कर 81,578 पर और निफ्टी 34 अंक बढ़कर 25,007 पर पहुँच गया। हालाँकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को 115.69 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाज़ार पर कुछ दबाव भी बना रहा। यह सब मिलकर रुपये की चाल को प्रभावित कर रहा है।

भारत-अमेरिका के रिश्ते: व्यापारिक साझेदारी की राह-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत और अमेरिका स्वाभाविक साझेदार हैं और दोनों देशों की टीमें मिलकर द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर काम कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि दोनों देश ‘ट्रेड बैरियर्स’ यानी व्यापारिक रुकावटों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर दोगुना टैरिफ लगा दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी खटास आ गई थी। लेकिन अब सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत से यह संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अपने संबंधों को फिर से सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। इस बातचीत का नतीजा भारतीय रुपये की चाल और शेयर बाज़ार पर भी बड़ा असर डाल सकता है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो रुपये को मजबूती मिल सकती है।

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