ग्वालियर की बड़ी ठगी का पर्दाफाश: हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी परिवार की जमानत

ग्वालियर का महा-धोखाधड़ी कांड: ₹1.30 करोड़ की ठगी, हाई कोर्ट से जमानत खारिज, और फरार आरोपियों पर इनाम!
हाई कोर्ट का कड़ा रुख: जमानत याचिका खारिज, आर्थिक अपराधों पर जीरो टॉलरेंस!-ग्वालियर में एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ शहर के जाने-माने व्यापारी धीरज अग्रवाल के साथ पूरे ₹1.30 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है। इस मामले में आरोपी गौतम राय रैली, उनकी पत्नी प्रिया रैली, पिता गुलशन राय रैली और एक कर्मचारी मानवेंद्र के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट का मानना है कि इतने बड़े आर्थिक अपराध की जांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन लोगों ने सिर्फ एक व्यापारी को ही नहीं, बल्कि कई लोगों को ठगा है और इन पर ब्लैकमेलिंग, साजिश रचने और झूठे केस कराने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। इसलिए, ऐसे मामलों में किसी भी तरह की राहत देना सही नहीं है।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई: फरार आरोपियों पर ₹5-5 हजार का इनाम घोषित!-इस धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी, यानी गौतम राय रैली, उनकी पत्नी प्रिया रैली, पिता गुलशन राय रैली और उनके कर्मचारी मानवेंद्र, पिछले ढाई महीने से पुलिस को चकमा दे रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसी को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक ने इन सभी फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस की कई टीमें इनकी तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं। यह भी पता चला है कि आरोपी बार-बार कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
धोखाधड़ी का मास्टर प्लान: कैसे हुई ₹1.30 करोड़ की ठगी?-धीरज अग्रवाल, जो कि बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल के बड़े भाई हैं और ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी हैं, उन्हें इस ठगी का शिकार बनाया गया। आरोपियों ने बड़ी चालाकी से उन्हें यह विश्वास दिलाया कि एक मकान बैंक में गिरवी रखा हुआ है और उसे छुड़ाने के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। मकान छुड़ाने और बाद में उसे बेचने का लालच देकर उन्होंने धीरज अग्रवाल से कुल ₹1.30 करोड़ रुपये ऐंठ लिए। लेकिन जब बाद में सच्चाई सामने आई, तो पता चला कि मकान तो बैंक में गिरवी था ही नहीं। जब धीरज अग्रवाल ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें न सिर्फ धमकियां दी गईं, बल्कि झूठे केसों में फंसाने की कोशिश भी की गई।
पुराना है आपराधिक इतिहास: लोन डिफॉल्ट से लेकर टैक्स चोरी तक!-यह कोई पहला मामला नहीं है जब गौतम राय रैली और उनके परिवार का नाम धोखाधड़ी में सामने आया हो। कोर्ट में पेश किए गए सबूतों से पता चलता है कि इनका पुराना रिकॉर्ड भी काफी दागदार है। इन्होंने अलग-अलग बैंकों से भारी-भरकम लोन लिए और जानबूझकर उन्हें चुकाया नहीं। बाद में, इन्हीं संपत्तियों को नीलामी में अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम पर बहुत सस्ते दामों में खरीद लिया। इतना ही नहीं, इन पर टैक्स चोरी के भी गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी विभाग से लगभग 340 करोड़ रुपये और आयकर विभाग से करीब 11 करोड़ रुपये की कर चोरी का मामला भी इनके खिलाफ दर्ज है, जो इनकी आपराधिक प्रवृत्ति को उजागर करता है।
ब्लैकमेलिंग और झूठे केसों का जाल: वीडियो में कबूलनामा भी!-आरोपियों पर यह भी इल्जाम है कि उन्होंने कई लोगों को ब्लैकमेल किया और झूठे केसों में फंसाया। एडवोकेट रमेश दुबे और सुनीता गांधी जैसे मामलों में भी इनके नाम सामने आए हैं। एक मामले में तो इन्होंने जमीन बेचकर पैसे ले लिए और बाद में पीड़ित के खिलाफ झूठी एफआईआर भी दर्ज करा दी। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि गौतम रैली का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह खुद स्वीकार कर रहा है कि उसने झांसी में एक व्यक्ति के खिलाफ झूठा बलात्कार का केस दर्ज करवाया था। यह सब उनके अपराधिक मानसिकता को साफ दर्शाता है।
व्यापार जगत में हड़कंप: सख्त कार्रवाई की मांग, न्याय की उम्मीद!-ग्वालियर के इस बड़े वित्तीय धोखाधड़ी कांड ने पूरे शहर के व्यापार जगत और आम समाज को झकझोर कर रख दिया है। इतने बड़े पैमाने पर हुई ठगी ने लोगों में गुस्सा और डर पैदा कर दिया है। व्यापारी वर्ग का मानना है कि अगर ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में और भी लोग इनके जाल में फंस सकते हैं। हालांकि, पुलिस और अदालत द्वारा दिखाई जा रही सख्ती से पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगी है कि उन्हें जल्द ही इंसाफ मिलेगा और ऐसे अपराधों पर लगाम लगेगी।



