ग्वालियर में जीतू पटवारी का बड़ा बयान: मुख्यमंत्री की भाषा पर सवाल, लाडली बहनों का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री के शब्दों पर बवाल: क्या यही है प्रदेश की राजनीति का नया चेहरा?
जब सीएम के बोलों पर उठे सवाल-हाल ही में ग्वालियर पहुंचे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक भाषण पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे गरिमामय पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जो अमर्यादित हो। चप्पल, जूते, चोरी और नशे जैसे शब्दों का प्रयोग किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। पटवारी ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी बातें न केवल मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत चरित्र पर प्रकाश डालती हैं, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति के स्तर को भी नीचे गिराती हैं। यह दर्शाता है कि कैसे शब्दों का चयन किसी भी नेता के व्यक्तित्व और उसके विचार को प्रतिबिंबित करता है, और यह प्रदेश के लिए चिंता का विषय है।
विपक्ष की भूमिका: तीन साल का आमंत्रण-जीतू पटवारी ने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री अपने वादों को पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के भीतर ही मुख्यमंत्री को बदलने की एक बड़ी मुहिम चल रही है। पटवारी ने एक तरह से मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा, “आप तीन साल तक मुख्यमंत्री रहिए, हम एक अच्छे और सच्चे विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे मुख्यमंत्री के वचन पत्र, घोषणा पत्र और मोदी की गारंटी पर उन्हें जवाबदेह ठहराएं। यह विपक्ष की भूमिका को परिभाषित करता है, जहाँ सरकार के वादों पर नजर रखी जाती है और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
लाडली बहना योजना: वादे और हकीकत का फासला-पीसीसी चीफ ने मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर कहा कि अगर वे वास्तव में बहनों का सम्मान करना चाहते हैं, तो उन्हें किए गए वादे के अनुसार पूरा लाभ देना चाहिए। पटवारी ने याद दिलाया कि लाडली बहनों को हर महीने 3000 रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन वर्तमान में उन्हें केवल 1200 रुपये ही मिल रहे हैं। उन्होंने इस अंतर को “1800 रुपये की चोरी” करार दिया। पटवारी का मानना है कि बहनों का असली सम्मान तभी होगा जब उन्हें वह राशि मिलेगी जिसका वादा किया गया था। यह मुद्दा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
भाजपा की अंदरूनी कलह पर तीखा प्रहार-ग्वालियर में अपनी बात रखते हुए, जीतू पटवारी ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी जमकर हमला बोला। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी अब कई गुटों में बंट चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे ही 2028 के चुनाव की आहट सुनाई देगी, भाजपा का “सूपड़ा साफ” हो जाएगा। पटवारी ने कहा कि प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और सही समय आने पर वह अपना जवाब जरूर देगी। यह बयान भाजपा के भीतर चल रही खींचतान और जनता के बढ़ते असंतोष को उजागर करने का प्रयास है।
राहुल गांधी के बयान पर भाजपा की सफाई पर पलटवार-जेन-ज़ी और वोटिंग राइट्स पर राहुल गांधी के बयान को भाजपा द्वारा भड़काऊ बताने के सवाल पर पटवारी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल अपने किए हुए कामों को छिपाना चाहती है। उन्होंने 2014 में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए वादों की याद दिलाई, जैसे कि रोजगार, अर्थव्यवस्था को सुधारना, किसानों की आय दोगुनी करना और भ्रष्टाचार खत्म करना, जिनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ। पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी सिर्फ वोट के अधिकार की बात कर रहे हैं, जबकि भाजपा काम करने के बजाय चोरी-छिपे सरकार बनाने का प्रयास करती है।



