बिहार में कांग्रेस की बैठक पर बीजेपी का हमला: राजनीतिक फायदे का खेल?

85 साल बाद कांग्रेस को बिहार की याद क्यों आई? बीजेपी का तीखा सवाल!
कांग्रेस की पटना में दस्तक: क्या है इसके पीछे का खेल?-बिहार की राजनीति में इन दिनों फिर से गरमा-गरमी का माहौल है। वजह है कांग्रेस की 85 साल बाद पटना में बुलाई गई कार्य समिति (CWC) की बैठक। इस बैठक ने बीजेपी को बैठे-बैठे एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि अचानक बिहार में कांग्रेस की दिलचस्पी सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 85 साल का लंबा इंतजार करने के बाद कांग्रेस को अब ही पटना की याद क्यों आई? क्या यह सब आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, या फिर कांग्रेस अपनी सीटों को सुरक्षित करने और गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है? बीजेपी के मुताबिक, यह बैठक कांग्रेस को बिहार में राजनीतिक बढ़त दिलाने का एक सोचा-समझा दांव है।
RJD और कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान: क्या कांग्रेस को चाहिए ‘ड्राइविंग सीट’?-बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस यह बैठक इसलिए कर रही है ताकि वह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से अधिक सीटें हासिल कर सके। रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि कांग्रेस, तेजस्वी यादव को गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा मानने से कतरा रही है। उनका यह भी दावा है कि कांग्रेस अब बिहार में खुद ‘ड्राइविंग सीट’ पर आना चाहती है और आगामी विधानसभा चुनावों में अपने लिए अधिक ताकत और प्रभाव हासिल करना चाहती है। यह बयान साफ दिखाता है कि बीजेपी, कांग्रेस और RJD के बीच के समीकरणों को करीब से देख रही है और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है। कांग्रेस की यह रणनीति गठबंधन में उसकी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
RJD के शासनकाल में कांग्रेस की चुप्पी: क्या यह सिर्फ दिखावा है?-रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जब बिहार में RJD का शासन था और उस दौरान अपहरण, घोटाले और जातीय हिंसा जैसी घटनाएं बढ़ी थीं, तब कांग्रेस ने कोई आवाज क्यों नहीं उठाई? अगर आज कांग्रेस बिहार की चिंता कर रही है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि उस समय उसने चुप्पी क्यों साधे रखी थी। बीजेपी का यह दावा है कि कांग्रेस की यह चिंता और सक्रियता पूरी तरह से चुनावी फायदे के लिए है और इसमें बिहार के लोगों के प्रति कोई वास्तविक सरोकार नहीं झलकता। यह आरोप कांग्रेस के पिछले राजनीतिक रुख पर सवाल उठाता है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का अपमान? बीजेपी का कांग्रेस पर एक और बड़ा आरोप-बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस ने देश के पहले राष्ट्रपति, महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद के योगदान को हमेशा नजरअंदाज किया है। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहे सादाकत आश्रम में, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को केवल दो कमरों और एक छोटे से आंगन वाले मकान में रहने के लिए मजबूर किया गया था। रविशंकर प्रसाद ने भावुक होते हुए कहा कि यह घटना कांग्रेस का असली चेहरा दिखाती है, जो देश के महान नेताओं के प्रति भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं रखती थी। यह आरोप कांग्रेस के इतिहास में उसके व्यवहार पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
नेहरू और कांग्रेस का इतिहास: क्या बिहार को कभी महत्व मिला?-रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के इतिहास पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति बनें, और तो और, वे उन्हें दूसरा कार्यकाल भी नहीं देना चाहते थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जयप्रकाश नारायण की गिरफ्तारी के समय भी बिहार की परवाह नहीं की। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने जगजीवन राम जैसे बड़े नेता को भी प्रधानमंत्री बनने से रोका। ये आरोप कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के बिहार और उसके नेताओं के प्रति रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं और उनके इतिहास की एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।
कांग्रेस की बैठक में बड़े चेहरे: क्या यह चुनावी चाल है?-कांग्रेस की कार्य समिति की यह अहम बैठक पटना के सादाकत आश्रम में हुई, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। विधानसभा चुनावों को देखते हुए, इस बैठक को कांग्रेस की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, बीजेपी का कहना है कि यह सब केवल चुनावी स्वार्थ साधने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस भले ही इसे अपनी रणनीति का हिस्सा बता रही हो, लेकिन बीजेपी के आरोपों से बिहार की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है, जो आने वाले समय में और तेज हो सकती है।



