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सोने-चांदी के दामों में उतार-चढ़ाव: जानिए ताज़ा हालात और कारण

सोना चमका, चांदी फिसली: जानिए क्या है बाजार का हाल!

घरेलू बाजार में सोने की धूम, चांदी थोड़ी नरम-दोस्तों, शुक्रवार को अपने ही देश के बाजार में सोने ने अच्छी छलांग लगाई! जहां 10 ग्राम सोना 171 रुपये बढ़कर 1,12,800 रुपये पर पहुंच गया, वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना लगभग एक जैसा ही रहा। ऐसा लगता है कि भारतीय निवेशकों का सोने पर भरोसा कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। लेकिन, चांदी की बात करें तो, शुक्रवार को थोड़ी गिरावट देखने को मिली। पिछले दिन रिकॉर्ड बनाने के बाद, चांदी 400 रुपये गिरकर 1,36,656 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। आपको याद होगा, इससे एक दिन पहले चांदी 1,37,530 रुपये के नए शिखर पर पहुंची थी। ये ऊपर-नीचे होना दिखाता है कि कभी-कभी देश के हालात और दुनिया के हालात, दोनों धातुओं पर अलग-अलग असर डालते हैं।

MCX पर सोने की चाल: अभी भी है डिमांड!-मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर नजर डालें तो, अक्टूबर में डिलीवरी वाले सोने का भाव 171 रुपये यानी 0.15% की तेजी के साथ 1,12,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस दौरान लगभग 2,834 लॉट का सौदा हुआ। दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने के कॉन्ट्रैक्ट में भी थोड़ी बढ़त दिखी, यह 56 रुपये बढ़कर 1,13,927 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा, जिसमें 13,573 लॉट का कारोबार हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि लोग अभी भी सोने को एक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं, और थोड़ी सी भी तेजी उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित कर रही है। ऐसा लगता है कि सोने में लोगों का भरोसा अभी कम नहीं हुआ है।

चांदी का रिकॉर्डतोड़ खेल: मुनाफा वसूली का समय?-वहीं, चांदी की बात करें तो, दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 400 रुपये यानी 0.29% की गिरावट के साथ 1,36,656 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में 17,462 लॉट का कारोबार हुआ। इसके अलावा, मार्च 2026 की डिलीवरी वाली चांदी भी 351 रुपये की गिरावट के साथ 1,38,051 रुपये पर बंद हुई। याद दिला दें, इससे एक दिन पहले चांदी ने 1,38,847 रुपये का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छुआ था। यानी, रिकॉर्ड बनाने के तुरंत बाद, कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को बुक करने का फैसला किया, जिससे कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। यह उतार-चढ़ाव तो कमोडिटी बाजार में चलता रहता है, खासकर जब कोई धातु अपने शिखर पर पहुंचती है।

दुनिया भर में सोने-चांदी का क्या है हाल?-अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की चाल कुछ ऐसी ही रही। दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने कांट्रैक्ट 0.15% बढ़कर 3,776.90 डॉलर प्रति औंस पर रहा। लेकिन, चांदी थोड़ी कमजोर दिखी और 0.21% की गिरावट के साथ 45.02 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। गौरतलब है कि गुरुवार को चांदी 45.50 डॉलर तक चढ़ गई थी, जो पिछले 14 सालों का सबसे ऊंचा स्तर था। इससे यह साफ होता है कि ग्लोबल लेवल पर सोना तो थोड़ा स्थिर दिख रहा है, लेकिन चांदी में ज्यादा हलचल मची हुई है।

अमेरिकी आंकड़ों का असर: ब्याज दरों पर सबकी नजर-बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका से आ रहे ताज़ा आर्थिक आंकड़ों का असर सोने और चांदी की कीमतों पर साफ दिख रहा है। गुरुवार को आए मजबूत आंकड़ों ने इस बात पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कटौती करेगा। इसी वजह से डॉलर भी तीन हफ्तों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जिससे सोने की बढ़त थोड़ी सीमित रह गई। अब सबकी नजर फेड की अगली मीटिंग पर है, जहां पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा बहुत मायने रखेगा। इसी डेटा से तय होगा कि इस साल ब्याज दरों में दो बार कटौती की उम्मीद की जा सकती है या नहीं।

दुनिया भर के टेंशन और टैक्स का खेल-विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए जा रहे नए आयात शुल्क और दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे माहौल में, लोग सोने जैसी सुरक्षित जगहों पर पैसा लगाना पसंद करते हैं। इसलिए, यह उम्मीद की जा सकती है कि सोने की मांग बनी रहेगी। खासकर एशिया में त्योहारों का मौसम आ रहा है, जिससे सोने की खरीदारी बढ़ सकती है और यह कीमतों को सहारा दे सकता है।

निवेशकों के लिए आगे क्या?-बाजार के विश्लेषकों की मानें तो, आने वाले समय में सोने की कीमतें शायद स्थिर रहेंगी, लेकिन चांदी में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रह सकता है। फेडरल रिजर्व के फैसले, डॉलर की चाल और दुनिया भर के हालात, ये सब मिलकर तय करेंगे कि सोना और चांदी किस दिशा में जाएंगे। इसलिए, फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे थोड़ा सतर्क रहें और सोच-समझकर ही कोई कदम उठाएं।

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