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Chhattisgarh

CGPSC भर्ती घोटाला: 400 पन्नों का चार्जशीट, चेयरमैन से उद्योगपति तक CBI की बड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाला: CBI की कड़ी कार्रवाई और जांच की पूरी कहानी-छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस मामले में जांच एजेंसी CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 400 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे इस घोटाले की पूरी कहानी, आरोपियों की स्थिति और जांच की वर्तमान स्थिति।

CBI की सख्त कार्रवाई: 13 आरोपियों पर चार्जशीट-CBI ने इस भर्ती घोटाले में 13 आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूतों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट करीब 400 पन्नों की है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत और गवाहों के बयान शामिल हैं। इस कार्रवाई से यह मामला और भी गंभीर हो गया है।

जेल में बंद बड़े नाम और फरार आरोपी-इस घोटाले में अब तक 12 आरोपी जेल में हैं। इनमें पूर्व CGPSC चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, आरती वासनिक, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार और साहिल सोनवानी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। वहीं, उत्कर्ष चंद्राकर नाम का एक आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

2021 की भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल-मामले की जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में CGPSC ने 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। प्री एग्जाम में 2565 उम्मीदवार पास हुए थे। इसके बाद मेन्स परीक्षा और इंटरव्यू के बाद 170 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी हुई। इस प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।

चेयरमैन के रिश्तेदारों का चयन विवाद का केंद्र-सबसे ज्यादा विवाद तब हुआ जब पता चला कि तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी के पांच करीबी रिश्तेदारों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया। उनके बेटे और बहू को डिप्टी कलेक्टर, भाई की बहू को जिला आबकारी अधिकारी, बहन की बेटी को श्रम अधिकारी और बड़े भाई के बेटे को डीएसपी बनाया गया। इस चयन ने पूरे मामले को शक के घेरे में ला दिया।

उद्योगपति परिवार की भूमिका भी जांच में-सिर्फ चेयरमैन के परिवार तक ही मामला सीमित नहीं रहा। उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार का भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था। कुल मिलाकर करीब डेढ़ दर्जन चयनित अभ्यर्थियों के नाम गड़बड़ी के आरोपों में फंसे हैं, जिसके चलते कोर्ट में याचिका दायर की गई।

कोर्ट के आदेश पर CBI जांच हुई तेज-याचिका के बाद कोर्ट ने इस मामले की गहन जांच का आदेश दिया। राज्य सरकार ने प्रकरण CBI को सौंपा, जिसने जांच तेज कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि चयनित अभ्यर्थियों में नेता, उद्योगपति और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े लोग भी शामिल थे, जिससे मामला और गंभीर हो गया। CGPSC भर्ती घोटाला अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है। CBI की कड़ी कार्रवाई और जांच से उम्मीद है कि इस मामले में न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। इस घोटाले ने छत्तीसगढ़ की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे सुधारना अब बेहद जरूरी हो गया है।

 

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