ममता बनर्जी का ED कार्रवाई के खिलाफ जोरदार विरोध मार्च: तृणमूल ने जताई कड़ी नाराजगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के खिलाफ खुद मोर्चा संभाला। I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के खिलाफ हुई ED छापेमारी के विरोध में ममता ने एक बड़े विरोध मार्च का नेतृत्व किया और इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया।
विरोध मार्च में नेताओं और समर्थकों की भारी भीड़-ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए इस मार्च में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, मंत्री, सांसद, विधायक और हजारों समर्थक शामिल हुए। चारों तरफ तृणमूल के झंडे और नारे गूंजे। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर विपक्ष को डराने और दबाने का आरोप लगाया गया।
8B बस स्टैंड से हाजरा मोड़ तक लंबी रैली-ममता ने मार्च की शुरुआत 8B बस स्टैंड से की और रैली हाजरा मोड़ की ओर बढ़ी। रास्ते भर समर्थकों का हुजूम उमड़ा रहा। तृणमूल कार्यकर्ताओं ने इसे सिर्फ नेता का विरोध नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संघीय ढांचे की रक्षा की लड़ाई बताया।
2026 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी आरोप-रैली में ममता और पार्टी नेताओं ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला कि चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है। तृणमूल ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतंत्र पर हमला बताया।
प्रतीक जैन के घर पहुंची थीं ममता-इस मार्च से एक दिन पहले ममता बनर्जी खुद ED की छापेमारी के दौरान प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पहुंचीं। उनका यह अचानक दौरा बंगाल की राजनीति में हलचल लेकर आया और तृणमूल ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
तृणमूल के गोपनीय दस्तावेज जब्त करने का आरोप-ममता ने आरोप लगाया कि ED की टीम वित्तीय जांच की आड़ में पार्टी के अंदरूनी दस्तावेज, हार्ड डिस्क और गोपनीय डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने इसे पार्टी की रणनीति में दखल देने की कोशिश बताया, न कि मनी ट्रेल की जांच।
केंद्रीय एजेंसाओं के दुरुपयोग का आरोप-ममता ने कहा कि केंद्र सरकार चुनाव के समय विपक्ष को दबाने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग करती है। उन्होंने साफ कहा कि तृणमूल डरने वाली नहीं है और सड़क से संसद तक अपनी लड़ाई जारी रखेगी।



