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पुणे मनपा चुनाव में शिवसेना का बड़ा दावा: “इतनी सीटें जीतेंगे कि फैसलों पर असर पड़ेगा”

नीलम गोर्हे का भरोसा: पुणे नगर निगम चुनाव में शिवसेना की निर्णायक भूमिका-वरिष्ठ शिवसेना नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोर्हे ने पुणे नगर निगम चुनाव को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उनका मानना है कि पार्टी इस बार इतनी मजबूत होगी कि नगर निगम के फैसलों पर उसका असर साफ नजर आएगा।

अकेले चुनाव लड़ रही शिवसेना, बीजेपी से गठबंधन नहीं हुआ-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, जो महायुति सरकार का हिस्सा है, 15 जनवरी को होने वाले 165 सदस्यीय पुणे मनपा चुनाव में अकेले मैदान में है। बीजेपी के साथ सीट बंटवारे पर सहमति न बनने के कारण गठबंधन नहीं हो पाया।

पूरे शहर में जोरदार प्रचार, बड़े नेताओं की सक्रियता-नीलम गोर्हे ने बताया कि शिवसेना ने पुणे के हर वार्ड तक पहुंच बनाई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई में विशाल रैली हुई, जबकि गुलाबराव पाटिल, योगेश कदम और निलेश राणे जैसे नेता लगातार प्रचार में लगे हुए हैं।

सीटों की संख्या पर चुप्पी, जीत का पूरा भरोसा-जब उनसे संभावित सीटों की संख्या पूछी गई, तो गोर्हे ने कोई आंकड़ा नहीं दिया। लेकिन उन्होंने कहा कि शिवसेना को इतनी सीटें मिलेंगी कि नगर निगम के कामकाज और नीतियों पर उसका प्रभाव साफ दिखेगा।

गठबंधन की उम्मीद थी, लेकिन प्राथमिकताएं बदलीं-गोर्हे ने बताया कि शुरुआत में बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद थी। पहले 35 सीटें तय हुई थीं, फिर 25 पर बात आई। लेकिन बाद में शिवसेना ने अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार वार्ड चुनना ज्यादा जरूरी समझा।

बीजेपी के प्रस्ताव से असहमति बनी बड़ी वजह-बीजेपी ने शिवसेना को केवल 12 सीटें दीं, जिनमें से सात ऐसे इलाकों में थीं जहां पार्टी को पहले हार मिली थी। शिवसेना ने बराबरी और सम्मानजनक गठबंधन की मांग की, जो संभव नहीं हो पाया।

अकेले चुनाव लड़ना शिवसेना के लिए मौका-गोर्हे के मुताबिक, अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी को अपनी ताकत परखने और मतदाताओं का भरोसा जीतने का मौका मिला है। हर चुनौती को आगे बढ़ने का अवसर मानते हुए शिवसेना पूरी ताकत से चुनाव में उतरी है।

चुनाव के बाद गठबंधन पर फिलहाल नहीं सोच रही शिवसेना-जब पूछा गया कि चुनाव के बाद बीजेपी से गठबंधन हो सकता है या नहीं, तो गोर्हे ने कहा कि यह अभी काल्पनिक सवाल है। फिलहाल पूरा ध्यान ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर है, बाद की राजनीति बाद में देखी जाएगी।

एजेंडे से सहमत पार्टी से गठबंधन संभव-गोर्हे ने स्पष्ट किया कि जो भी पार्टी शिवसेना के घोषणापत्र के मुद्दों जैसे पहाड़ियों की रक्षा, पर्यावरण संतुलन, सतत विकास और आवास से सहमत होगी, उससे गठबंधन पर विचार किया जा सकता है। अंतिम फैसला एकनाथ शिंदे करेंगे।

घोषणापत्र में पर्यावरण और जैव विविधता पर खास जोर-शिवसेना ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि सत्ता में आने पर पुणे की पहाड़ियों और जैव विविधता क्षेत्रों की सुरक्षा की जाएगी। आसपास की वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

विकास और पर्यावरण को साथ लेकर चलने की जरूरत-गोर्हे ने कहा कि अब समय आ गया है कि विकास योजनाओं को पर्यावरण और जैव विविधता के साथ संतुलित तरीके से देखा जाए। बिना संतुलन के विकास से शहर की प्राकृतिक सुंदरता और भविष्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।

PMRDA क्षेत्र के लिए ‘पुणे विकास परिषद’ का प्रस्ताव-उन्होंने बताया कि पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी क्षेत्र को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिवसेना ‘पुणे विकास परिषद’ बनाने पर विचार कर रही है, जिसमें विशेषज्ञ और सभी दलों के जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

लोगों की भागीदारी से शहर की योजना बनाने पर जोर-गोर्हे के अनुसार, चाहे फंड केंद्र से आए, राज्य से या उद्योगों की CSR से, शिवसेना की कोशिश होगी कि शहर की योजना में आम लोगों की सीधी भागीदारी हो। इसका मकसद है ज्यादा सहभागी, पारदर्शी और सम्मानजनक विकास मॉडल बनाना।

 

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