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बजट 2026-27 में घरेलू उद्योग और निर्यात को मजबूत करने पर डेलॉयट की खास सलाह

डेलॉयट इंडिया ने आगामी बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका मानना है कि अगर आयात शुल्क प्रणाली को सरल बनाया जाए और कुछ सेक्टरों में बजटीय आवंटन बढ़ाया जाए, तो देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा।

घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम-डेलॉयट का कहना है कि आयात शुल्क ढांचे को व्यावहारिक और संतुलित बनाना होगा। इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, बजट में कुछ प्रमुख क्षेत्रों को ज्यादा फंड देना जरूरी है ताकि उत्पादन क्षमता बढ़े।

SEZ नियमों में सुधार से कारोबार होगा आसान-स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से जुड़े नियमों में बदलाव जरूरी हैं। ड्यूटी-फ्री सप्लाई की अनुमति, सब-कॉन्ट्रैक्टिंग नियमों में ढील और वैल्यू एडिशन को कस्टम ड्यूटी से मुक्त करने जैसे कदम कारोबार को सरल और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।

कस्टम्स एमनेस्टी स्कीम से विवादों में कमी-डेलॉयट ने सुझाव दिया है कि सीमित दायरे में कस्टम्स एमनेस्टी स्कीम लाई जाए। इससे पुराने कस्टम विवादों का समाधान होगा, कानूनी झंझट कम होंगे और उद्योगों को स्थिर माहौल मिलेगा, जिससे निवेश और उत्पादन बढ़ेगा।

बजट 2026-27: उद्योग जगत की उम्मीदें-1 फरवरी को पेश होने वाले बजट पर उद्योग जगत की नजरें टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि सरकार घरेलू उत्पादन, निर्यात और निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाएगी, जिससे आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

इम्पोर्ट ड्यूटी स्ट्रक्चर में संतुलन जरूरी-डेलॉयट के पार्टनर गुलज़ार डिडवानिया ने कहा कि जहां भारत में पार्ट्स और कंपोनेंट्स का उत्पादन हो रहा है, वहां आयात शुल्क कम होना चाहिए। इससे घरेलू उद्योगों को फायदा मिलेगा और उत्पादन बढ़ेगा।

तैयार माल पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव-डिडवानिया ने यह भी कहा कि फिनिश्ड प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए। इससे विदेशी तैयार माल की आयात कम होगी, देश में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और घरेलू कंपनियों को निर्यात के नए अवसर मिलेंगे।

PMP स्कीम को और सेक्टरों तक फैलाने की जरूरत-फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (PMP) के सफल परिणामों को देखते हुए डेलॉयट ने इसे मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा अन्य उद्योगों में भी लागू करने की सलाह दी है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों बढ़ेंगे।

R&D और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना जरूरी-डिडवानिया के अनुसार, PMP के साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए बजट बढ़ाने से भारत वैल्यू चेन में ऊपर उठ सकता है। इससे देश पुर्जों के साथ-साथ तैयार उत्पाद भी बड़े पैमाने पर निर्यात कर सकेगा।

MAI स्कीम को मजबूत करने की मांग-डेलॉयट ने मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव (MAI) स्कीम के बजट और दायरे को बढ़ाने की भी सलाह दी है। इससे एक्सपोर्ट प्रमोशन संस्थाओं को मजबूती मिलेगी और भारतीय निर्यातक नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर पाएंगे।

निर्यात-आयात के ताजा आंकड़े क्या दिखाते हैं-2025-26 के अप्रैल से नवंबर तक भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 2.62% बढ़कर 292.07 अरब डॉलर हो गया है। वहीं आयात 5.59% बढ़कर 515.21 अरब डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 223.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह आंकड़े घरेलू उत्पादन और निर्यात को और मजबूत करने की जरूरत को दर्शाते हैं।

 

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