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अजित पवार की अंतिम विदाई: कतेवाड़ी में उमड़ा जनसैलाब, ‘अजित दादा अमर रहें’ के नारों से गूंजा पूरा गांव

गांव में भारी शोक का माहौल, लोग टूट पड़े-महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन की खबर से उनके पैतृक गांव कतेवाड़ी में गम का सैलाब उमड़ पड़ा। पुणे जिले के कतेवाड़ी और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग उनके घर के बाहर जमा हो गए। एनसीपी कार्यकर्ता और आम ग्रामीण दोनों की भारी भीड़ ने इस दुखद घटना पर अपनी संवेदना जताई। हर कोई नम आंखों से “अजित दादा अमर रहें” और “अजित दादा परत या” जैसे नारे लगा रहा था। गांव की गलियां सन्नाटे में डूबी थीं, लेकिन हर तरफ आंसुओं की आवाजें सुनाई दे रही थीं। लोग इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि उनका प्रिय नेता अब उनके बीच नहीं रहा।

हादसा जिसने महाराष्ट्र को झकझोर दिया-66 वर्षीय अजित पवार का बुधवार सुबह पुणे के करीब 100 किलोमीटर दूर बरामती एयरस्ट्रिप के पास विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस हादसे में दो पायलट, एक फ्लाइट अटेंडेंट और एक निजी सुरक्षा अधिकारी की भी जान चली गई। यह हादसा पूरे महाराष्ट्र के लिए एक बड़ा सदमा था। राजनीतिक गलियारों से लेकर गांवों तक हर कोई इस खबर से स्तब्ध था। लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जो नेता कल तक उनके बीच था, आज हमेशा के लिए चला गया। यह सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक गहरा झटका था।

अस्पताल से गांव तक: आंसुओं भरा अंतिम सफर-गुरुवार सुबह अजित पवार के पार्थिव शरीर को पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी अस्पताल से उनके पैतृक गांव कतेवाड़ी लाया गया। जैसे ही शव गांव पहुंचा, माहौल और भी भारी हो गया। महिलाएं रो पड़ीं, बुजुर्गों की आंखें छलक आईं और युवा भी खुद को रोक नहीं पाए। हर कोई अंतिम दर्शन के लिए आगे बढ़ रहा था। लोग फूल लेकर, हाथ जोड़कर, नम आंखों से अपने नेता को आखिरी बार देखने पहुंचे। यह अंतिम यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि एक ऐसे नेता को सम्मान देने का पल था, जिसने अपने इलाके के लिए अपार योगदान दिया था।

“ऐसा नेता फिर नहीं मिलेगा” – गांव वालों की भावुक प्रतिक्रिया-65 वर्षीय गणपत थोंबरे, जो कतेवाड़ी के ही रहने वाले हैं, अपनी भावनाओं को शब्दों में बयां नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “24 घंटे बीत गए, लेकिन अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि दादा अब हमारे बीच नहीं हैं। ऐसा नेता फिर पैदा नहीं होगा।” उन्होंने बताया कि अजित पवार गांव-गांव की छोटी-छोटी समस्याओं पर भी ध्यान देते थे। थोंबरे ने यह भी बताया कि अजित पवार ने उनकी पोती को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने में व्यक्तिगत मदद की थी। उनके अनुसार, दादा ने पूरे इलाके की तस्वीर ही बदल दी थी।

सड़क, स्कूल और विकास की अमिट छाप-गांव वाले बार-बार यही कहते रहे कि अजित पवार ने इस क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी। गणपत थोंबरे ने भावुक होकर कहा कि बेहतर सड़कें, स्कूल और बुनियादी सुविधाएं उनके नेतृत्व की देन हैं। उन्होंने बताया कि अजित पवार ने कतेवाड़ी, खटलपट्टा, सोंगाईन और आसपास के गांवों को कभी नजरअंदाज नहीं किया। धाराशिव जिले के तेर से आए चंद्रकांत माली ने कहा, “महाराष्ट्र ने आज एक अनमोल रत्न खो दिया।” यह बात वहां मौजूद कई लोगों की भावना को बयां कर रही थी।

परिवार का दर्द और अंतिम दर्शन का भावुक माहौल-जहां अजित पवार का पार्थिव शरीर रखा गया था, वहां उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार, बेटे पार्थ और जय, और छोटे भाई श्रीनिवास पवार लोगों की श्रद्धांजलि स्वीकार कर रहे थे। सभी हाथ जोड़कर आने वालों का अभिवादन कर रहे थे, लेकिन उनकी आंखों में गहरा दर्द साफ नजर आ रहा था। लोग परिवार के पास जाकर उन्हें ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन शब्द कम पड़ रहे थे। माहौल बेहद भावुक था, हर कोई परिवार के दुख में खुद को जोड़कर देख रहा था, जैसे यह सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि अपने घर का कोई सदस्य चला गया हो।

राजनीति और फिल्मी दुनिया की भी मौजूदगी-अजित पवार को श्रद्धांजलि देने के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे अपनी पत्नी और बेटे अमित के साथ पहुंचे। अभिनेता रितेश देशमुख भी अंतिम दर्शन के लिए कतेवाड़ी आए। इसके अलावा कई राजनीतिक नेता और जानी-मानी हस्तियां भी वहां मौजूद थीं। सभी ने अजित पवार के योगदान को याद किया और परिवार के प्रति संवेदना जताई। इससे साफ था कि अजित पवार सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि हर वर्ग में उनका सम्मान था।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार-कतेवाड़ी स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के बाद अजित पवार के पार्थिव शरीर को बरामती के विद्या प्रतिष्ठान के खेल मैदान ले जाया गया, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन ने इस अंतिम यात्रा के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। हजारों लोग इस अंतिम विदाई में शामिल होने की संभावना है। यह विदाई सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक युग के खत्म होने जैसी महसूस हो रही है।

 

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