उज्जैन की सड़कों पर सवर्ण समाज का उबाल, मशाल और मोबाइल लाइट मार्च में फूटा गुस्सा

उज्जैन की सड़कों पर सवर्ण समाज का गुस्सा: मशाल और मोबाइल लाइट मार्च में भड़का विरोध
सवर्ण समाज ने निकाला जोरदार मार्च-उज्जैन की गलियों में आज सवर्ण समाज ने अपनी नाराजगी जोरदार तरीके से जताई। टावर चौक से शहीद पार्क तक मशाल और मोबाइल लाइट मार्च निकाला गया, जिसमें छात्र, मंदिर के पुजारी और समाजसेवी बड़ी संख्या में शामिल हुए। वे केंद्र सरकार की नीतियों और नए यूजीसी नियमों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, जो उनके भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी की कड़ी चेतावनी-महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने मंच से कहा कि आरक्षण को शुरू में केवल 10 साल के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसे राजनीतिक कारणों से बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल एक वर्ग ने ही संघर्ष किया है। उनका मानना है कि सामान्य वर्ग के बच्चे मेहनत के बावजूद पीछे रह जाते हैं, जो गलत है।
छात्रों का दर्द और असंतोष-छात्र आश्विन रघुवंशी ने बताया कि वे पूरी फीस भरते हैं, फिर भी नौकरी में पिछड़ जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए यूजीसी नियमों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को गलत तरीके से “पीड़क” दिखाया जा रहा है। उनका कहना है कि 25 प्रतिशत सवर्ण छात्र 75 प्रतिशत अन्य छात्रों पर अत्याचार नहीं कर सकते।
समाजसेवी की सरकार को सख्त चेतावनी-सुरेंद्र चतुर्वेदी ने इस आंदोलन को पहला चरण बताया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर यह कानून वापस नहीं लिया गया तो यह पूरे देश में बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर समाज में नफरत फैलाई जा रही है, जो खतरनाक है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।



