चुनावी निर्देशों पर सख़्ती: पश्चिम बंगाल सरकार से ईसी ने 9 फ़रवरी तक मांगा जवाब

चुनाव आयोग की नाराज़गी: पश्चिम बंगाल सरकार ने चुनावी निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया?-चुनाव आयोग ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार के चुनावी कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने कहा है कि कई अहम चुनावी निर्देशों को लागू करने में देरी हो रही है, जबकि बार-बार इन बातों की याद दिलाई जा चुकी है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि चुनाव आयोग ने किन-किन मुद्दों पर नाराज़गी जताई है और सरकार से क्या-क्या जवाब मांगे गए हैं।
चुनावी निर्देशों के पालन में देरी पर आयोग की चिंता-चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में साफ कहा है कि चुनाव से जुड़े जरूरी निर्देशों का पालन तय समय के अंदर नहीं हुआ है। कई बार याद दिलाने के बावजूद भी ये निर्देश लागू नहीं किए गए। आयोग ने राज्य सरकार से 9 फरवरी तक सभी लंबित मामलों की स्पष्ट और समयबद्ध रिपोर्ट देने को कहा है। यह कदम चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर न होने पर सवाल-चुनाव आयोग ने दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, दो सहायक अधिकारियों और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ अभी तक एफआईआर दर्ज न होने पर भी सवाल उठाए हैं। ये मामले जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 से जुड़े हैं। आयोग ने अगस्त 2025 और जनवरी 2026 में इस संबंध में पत्र भेजे थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे आयोग को नियमों की अनदेखी लग रही है।
बिना अनुमति नियुक्तियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?-सुमित्रा प्रतिम प्रधान के मामले में चुनाव आयोग ने कड़ी नाराज़गी जताई है। आरोप है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए 11 अतिरिक्त सहायक ERO की नियुक्ति अपने स्तर पर कर दी। आयोग ने 48 घंटे के अंदर इस मामले में निलंबन की कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। यह सुप्रीम कोर्ट के 2000 के आदेश और आयोग के 2023 के निर्देशों का उल्लंघन माना जा रहा है।
इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वरों के तबादले पर आपत्ति-चुनाव आयोग ने तीन इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वरों के तबादले को भी अपने निर्देशों के खिलाफ बताया है। आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया। जनवरी 2026 में इन तबादलों को रद्द करने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन तय समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे आयोग की चिंता और बढ़ गई है।
अयोग्य अधिकारियों की नियुक्ति पर आयोग की सख्त टिप्पणी-चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि कई अधिकारियों की नियुक्ति ERO और रिटर्निंग ऑफिसर के पदों पर नियमों के अनुसार नहीं हुई है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक, इन पदों पर SDO/SDM स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए आयोग ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।
9 फरवरी तक जवाब देने की अंतिम चेतावनी-आयोग ने अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भेजे गए कई पत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी लंबित मामलों पर 9 फरवरी, दोपहर 3 बजे तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है।



