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पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की आत्मकथा विवाद: राहुल गांधी और पेंगुइन प्रकाशक के बीच तकरार

नरवणे की किताब को लेकर नया राजनीतिक विवाद-पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा को लेकर इन दिनों एक बड़ा विवाद छिड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिसंबर 2023 की एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के दावे पर सवाल उठाए हैं। राहुल का कहना है कि जब नरवणे ने खुद अपनी किताब उपलब्ध होने की बात कही थी, तो प्रकाशक कैसे कह सकता है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई।

राहुल गांधी ने दिखाया नरवणे का पुराना पोस्ट-संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने नरवणे की एक्स (पूर्व ट्विटर) पर की गई पोस्ट पढ़कर सुनाई, जिसमें लिखा था, “हेलो फ्रेंड्स, मेरी किताब अब उपलब्ध है। लिंक फॉलो करें। हैप्पी रीडिंग। जय हिंद।” राहुल ने कहा कि यह साफ दिखाता है कि किताब बाजार में थी। उन्होंने सवाल उठाया कि या तो नरवणे गलत कह रहे हैं या पेंगुइन, दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते।

राहुल का सीधा सवाल: किस पर करें भरोसा?- राहुल गांधी ने कहा कि पेंगुइन का कहना है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई, लेकिन अमेजन पर यह उपलब्ध है और नरवणे ने खुद 2023 में इसे खरीदने की अपील की थी। उन्होंने कहा, “आप तय करें कि पेंगुइन सच बोल रहा है या पूर्व सेना प्रमुख। मैं तो जनरल नरवणे पर भरोसा करता हूं।” साथ ही राहुल ने आरोप लगाया कि किताब में कुछ ऐसे बयान हैं जो सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए असहज हो सकते हैं।

‘नरेंदर सरेंडर’ पोस्टर और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का जिक्र-राहुल गांधी ने संसद के मकर द्वार के पास विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया, जहां ‘Narender Surrender’ लिखा पोस्टर था। उन्होंने कहा कि यह सब उसी संदर्भ में है और इसी वजह से भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी हुई। इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया।

पेंगुइन रैंडम हाउस का जवाब- पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ किया है कि ‘Four Stars of Destiny’ नामक आत्मकथा के प्रकाशन का एकमात्र अधिकार उनके पास है। कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है, न तो प्रिंट कॉपी जारी की गई है और न ही डिजिटल फॉर्म में इसे सार्वजनिक किया गया है।

एफआईआर और कॉपीराइट उल्लंघन का मामला-दिल्ली पुलिस ने कथित अवैध डिजिटल प्रसार को लेकर एफआईआर दर्ज की है। बताया गया है कि किताब की पांडुलिपि डिजिटल और अन्य फॉर्मेट में गैरकानूनी तरीके से फैलाई जा रही थी। पेंगुइन ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के किसी भी रूप में किताब साझा करना कॉपीराइट का उल्लंघन होगा और कानूनी कार्रवाई होगी।

अब असली सच क्या होगा?-पूरा विवाद इस बात पर टिका है कि किताब प्रकाशित हुई या नहीं। राहुल गांधी नरवणे की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हैं, जबकि प्रकाशक इसे पूरी तरह नकार रहा है। अब जांच के बाद ही सच सामने आएगा। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

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