रूस-यूक्रेन युद्ध में चौंकाने वाला दावा: सरेंडर करने जा रहे सैनिकों पर अपनी ही सेना का हमला

रूस-यूक्रेन युद्ध में बढ़ती मानवता की चिंता: रूसी सेना अपने सैनिकों पर कर रही है हमला?-रूस-यूक्रेन युद्ध की जटिलता और भी बढ़ गई है। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी सेना उन सैनिकों को भी निशाना बना रही है जो जान बचाने के लिए आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। यह खबर युद्ध की भयावहता को और गहरा करती है और दिखाती है कि मोर्चे पर हालात कितने तनावपूर्ण और मानवीय दृष्टि से चिंताजनक हो चुके हैं।
चासिव यार में आत्मसमर्पण करने वाले सैनिकों पर हमला-यूक्रेन के चासिव यार इलाके में कुछ दिन पहले एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। दो रूसी सैनिक जब यूक्रेनी सेना के सामने सरेंडर करने बढ़ रहे थे, तो उन्हें लगा कि अब उनकी जान बच जाएगी। लेकिन उनकी अपनी ही सेना ने पीछे से आत्मघाती ड्रोन से हमला कर दिया। इस हमले में एक सैनिक की मौत हो गई, जबकि दूसरा किसी तरह बचकर यूक्रेनी सीमा में पहुंचा।
‘वीर मृत्यु’ की मानसिकता और सैनिकों पर बढ़ता दबाव-रिपोर्ट के अनुसार रूसी सेना में यह सोच बढ़ाई जा रही है कि सरेंडर करना कायरता है और लड़ते हुए मरना ही बहादुरी है। जिंदा लौटने वाले सैनिकों को शक की नजर से देखा जाता है। इस मानसिकता के कारण मोर्चे पर आत्मसमर्पण या पीछे हटने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे सैनिकों पर मानसिक दबाव और बढ़ गया है।
युद्ध के तनाव में नशे का सहारा-यूक्रेनी खुफिया एजेंसी की रिकॉर्डिंग में रूसी सैनिकों की बातचीत सामने आई है, जिसमें वे नशीले पदार्थों की मांग कर रहे हैं। लगातार गोलाबारी, मौत का डर और हार की संभावना ने सैनिकों की मानसिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। तनाव और भय ने कई सैनिकों को मानसिक रूप से टूटने पर मजबूर कर दिया है।
कैदियों की अदला-बदली पर उठ रहे सवाल-कैदियों की अदला-बदली को लेकर आरोप लगे हैं कि रूस केवल उन्हीं सैनिकों को वापस लेने में रुचि रखता है जिन्हें फिर से युद्ध में भेजा जा सके। जो घायल या लड़ने के लिए असमर्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता नहीं दी जाती। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सैनिकों को इंसान की बजाय केवल युद्ध की मशीन समझा जा रहा है।



