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बांग्लादेश में नई सरकार की शुरुआत: तारिक रहमान बने प्रधानमंत्री, कैबिनेट में अल्पसंख्यकों को खास जगह

बांग्लादेश में नई सरकार का गठन: तारिक रहमान बने प्रधानमंत्री, भारत ने जताया समर्थन-कई महीनों की राजनीतिक हलचल के बाद बांग्लादेश में नई सरकार ने 17 फरवरी 2026 को काम संभाल लिया है। तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, जिसमें भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला समेत कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। BNP गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता संभाली है, जिससे देश में नया दौर शुरू हुआ है।

नई कैबिनेट में अनुभव और संतुलन का मिला जुला संगम-तारिक रहमान की कैबिनेट में अनुभवी नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को स्थानीय सरकार और ग्रामीण विकास मंत्रालय मिला है, जबकि गृह मंत्रालय की कमान सलाहुद्दीन अहमद के हाथ में है। वित्त और योजना विभाग अमीर खसरू महमूद चौधरी को सौंपा गया है, और विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी खलीलुर रहमान को दी गई है। नई टीम के सामने देश की अर्थव्यवस्था सुधारने और कानून व्यवस्था मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।

अल्पसंख्यकों को मिला प्रतिनिधित्व, समावेशी राजनीति का संदेश-नई सरकार ने कैबिनेट में अल्पसंख्यक समुदायों को भी जगह दी है, जिससे समावेशी राजनीति का संकेत मिलता है। एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को मंत्री बनाया गया है। वरिष्ठ नेता निताई रॉय चौधरी को सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय मिला है, जबकि दीपेन दीवान को चटगांव पहाड़ी इलाकों के मामलों का मंत्री बनाया गया है। यह नियुक्तियां सरकार की सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

निताई रॉय चौधरी: एक भरोसेमंद नेता-निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश की राजनीति में एक जाना-माना नाम हैं। वे BNP के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ वकील हैं। पश्चिमी मगुरा क्षेत्र से चुनाव जीतकर उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। वे पहले भी सांसद और मंत्री रह चुके हैं और पार्टी के भीतर तारिक रहमान के भरोसेमंद सलाहकार माने जाते हैं। उनके अनुभव को देखते हुए उनकी भूमिका नई सरकार में अहम मानी जा रही है।

भारत के नजरिए से इस फैसले की अहमियत-निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाए जाना भारत-बांग्लादेश रिश्तों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों ने भारत में चिंता बढ़ाई थी। ऐसे में एक वरिष्ठ हिंदू नेता को कैबिनेट में शामिल करना नई सरकार का भरोसा दिलाने वाला कदम माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और समावेशी शासन को गंभीरता से ले रही है, जो दोनों देशों के रिश्तों पर सकारात्मक असर डाल सकता है।

बांग्लादेश में इस नई सरकार के गठन से न केवल देश में राजनीतिक स्थिरता आएगी, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और भारत-बांग्लादेश के रिश्ते भी मजबूत होंगे। आने वाले समय में इस बदलाव के असर को देखना दिलचस्प होगा।

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