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एपस्टीन फाइल्स विवाद: CPI(M) ने मंत्री हरदीप पुरी को हटाने की उठाई मांग, सरकार पर बचाने का आरोप

एपस्टीन फाइल्स में मंत्री का नाम आने पर सियासी घमासान: क्या है पूरा मामला?- नई दिल्ली: हाल ही में सामने आए एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम आने के बाद से सियासी माहौल गरमा गया है। इस मामले को लेकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि मंत्री का नाम सामने आना बेहद शर्मनाक है और देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।

सरकार पर पारदर्शिता न बरतने का आरोप-CPI(M) ने आरोप लगाया है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरत रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने न तो मंत्री से कोई स्पष्ट जवाब मांगा है और न ही उनकी जवाबदेही तय करने की कोशिश की है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सच्चाई को सामने आने से रोका जा रहा है।

संसद में चर्चा रोकने पर उठाए सवाल-CPI(M) ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में एपस्टीन फाइल्स पर चर्चा की अनुमति नहीं दी। पार्टी का मानना है कि उपलब्ध तथ्यों के बावजूद, मंत्री हरदीप पुरी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सही जानकारी नहीं दी। इसके बावजूद, उन्हें पद से हटाने के बजाय हर संभव तरीके से बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

प्रधानमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग-CPI(M) के पोलित ब्यूरो ने स्पष्ट रूप से कहा है कि देश की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री को तुरंत हरदीप पुरी को मंत्रिमंडल से हटा देना चाहिए। पार्टी का मानना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो देश की साख को नुकसान पहुंचेगा और जनता का विश्वास भी कम होगा, जो कि लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है।

एपस्टीन नेटवर्क: अंतरराष्ट्रीय खुलासे और चिंताएं-यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब एपस्टीन फाइल्स से लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग और डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन पर मामले को दबाने के आरोप लगे हैं, फिर भी इस नेटवर्क की गतिविधियां धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रही हैं।

ताकतवर लोगों के नाम आने का दावा-CPI(M) का दावा है कि इस नेटवर्क में कई प्रभावशाली लोग शामिल थे, जिनमें राजनेता, बड़े उद्योगपति और जानी-मानी हस्तियां शामिल हैं। पार्टी ने विशेष रूप से उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम भी लिया है। पार्टी का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से अपनी शक्ति और प्रभाव का दुरुपयोग करता रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई और सख्ती-इस मामले में कई देशों में कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उदाहरण के तौर पर, ब्रिटेन में प्रिंस एंड्रयू से उनके शाही अधिकार छीन लिए गए और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। इसके अलावा, कई अन्य देशों में भी संबंधित व्यक्तियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
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