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राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा का अनावरण: शशि थरूर ने जताई खुशी, BJP-कांग्रेस के बीच छिड़ी नई बहस

राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा: देश के महान नेता को सम्मान, राजनीति में नई बहस
राजाजी की प्रतिमा लगने पर देश में नई चर्चा- भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें राजाजी के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा राष्ट्रपति भवन में स्थापित होने के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। इस कदम का स्वागत भी हुआ है और साथ ही कुछ सियासी प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

शशि थरूर ने जताई खुशी और गर्व-कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राजाजी की प्रतिमा लगाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राजाजी भारत के एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल थे और उनके विचार, आर्थिक सोच, सामाजिक न्याय और संवैधानिक स्वतंत्रता के प्रति उनका सम्मान आज भी प्रेरणा देता है।

राजाजी के विचारों से प्रभावित रहे शशि थरूर-शशि थरूर ने बताया कि वे छात्र जीवन से ही राजाजी के विचारों और उनकी पार्टी से प्रभावित रहे हैं। उन्होंने राजाजी के उदार आर्थिक नजरिए, निजी उद्यम के समर्थन और संविधान में दिए गए अधिकारों के प्रति उनकी गहरी आस्था की प्रशंसा की।

भाजपा ने थरूर के बयान का स्वागत किया, विपक्ष पर निशाना साधा- भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने थरूर के बयान का स्वागत करते हुए विपक्ष के कुछ नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश अब औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ रहा है और भारतीय महान नेताओं को सही सम्मान दे रहा है।

कुछ नेताओं ने जताई चिंता, इतिहास को संरक्षित रखने की बात कही- कुछ विपक्षी नेताओं ने पुराने औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर नई प्रतिमाएं लगाने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इतिहास को पूरी तरह मिटाने के बजाय उसे संरक्षित रखना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां देश के अतीत से सीख सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने इसे गर्व का क्षण बताया-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजाजी की प्रतिमा के अनावरण को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश के महान राष्ट्रनिर्माताओं को सम्मान देने और उनकी यादों को संजोने का महत्वपूर्ण अवसर है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया प्रतिमा का अनावरण- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक प्रांगण में राजाजी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर ‘राजाजी उत्सव’ का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और फिल्म प्रदर्शन शामिल थे।

गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने पर जोर- प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश अब गुलामी के प्रतीकों से बाहर निकलकर अपनी भारतीय संस्कृति और महान नेताओं को सम्मान दे रहा है। यह कदम देश के आत्मविश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राजाजी का जीवन देशसेवा और स्वतंत्रता आंदोलन को समर्पित- चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास प्रेसीडेंसी में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध वकील, विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर कई आंदोलनों में हिस्सा लिया और देश की आजादी में अहम भूमिका निभाई।

संविधान निर्माण में राजाजी का योगदान और भारत रत्न सम्मान- राजाजी संविधान सभा के सदस्य थे और देश के निर्माण में उनका योगदान महत्वपूर्ण था। 1954 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। आज भी उन्हें देश के महान राष्ट्रनिर्माताओं में गिना जाता है।

राजाजी की प्रतिमा से शुरू हुई नई बहस, सम्मान पर सबकी सहमति-राष्ट्रपति भवन में राजाजी की प्रतिमा लगाए जाने के बाद राजनीतिक बहस जरूर शुरू हुई है, लेकिन सभी इस बात पर सहमत हैं कि राजाजी का देश के लिए अमूल्य योगदान रहा है और उन्हें सम्मान देना देश के इतिहास को सम्मान देने जैसा है।

यह कदम न केवल राजाजी के योगदान को याद करने का मौका है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को भी मजबूत करता है। राजाजी की प्रतिमा ने हमें हमारे इतिहास से जुड़ने और उसे समझने का एक नया रास्ता दिखाया है।

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