चीन का रक्षा बजट बढ़ा, क्या भारत और दुनिया के लिए खतरा?

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बार चीन ने अपने रक्षा खर्च को लगभग 275 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है, जो पिछले साल से करीब 25 अरब डॉलर ज्यादा है। इस कदम के पीछे चीन की सेना को आधुनिक बनाने और अमेरिका जैसी सैन्य ताकत बनने की कोशिश है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बढ़ोतरी का मतलब और इसके असर।
चीन ने रक्षा बजट में 10% से ज्यादा की बढ़ोतरी की-चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में बताया कि इस साल देश का रक्षा बजट करीब 1.9 ट्रिलियन युआन यानी लगभग 275 अरब डॉलर रखा गया है। यह पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी है। यह साफ करता है कि चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहा है और इसके लिए भारी निवेश कर रहा है।
चीन का दावा: खर्च अभी भी दूसरे देशों से कम है-चीन सरकार ने कहा है कि अगर रक्षा खर्च के कई मानकों को देखें, तो उनका खर्च अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसमें जीडीपी के अनुपात में खर्च, प्रति व्यक्ति खर्च और सैनिकों पर होने वाला खर्च शामिल है। चीन का कहना है कि ये खर्च संतुलित और नियंत्रित स्तर पर हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति के हिसाब से सही हैं।
पिछले साल भी रक्षा बजट में बढ़ोतरी हुई थी-पिछले साल चीन ने अपने रक्षा बजट में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जो करीब 249 अरब डॉलर था। यह 2024 के मुकाबले लगभग 17 अरब डॉलर ज्यादा था। चीन लगातार अपने सैन्य खर्च को बढ़ा रहा है ताकि अपनी सेना को आधुनिक और मजबूत बनाया जा सके।
पड़ोसी देशों पर बढ़ता दबाव, खासकर भारत पर-चीन का रक्षा बजट अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है। इसके लगातार बढ़ने से भारत और अन्य पड़ोसी देशों को भी अपने रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव महसूस हो रहा है। खासकर ऐसे वक्त में जब कई देशों की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है, चीन की यह बढ़ोतरी क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
तेजी से हो रहा चीन का सैन्य आधुनिकीकरण-विशेषज्ञों के अनुसार चीन सिर्फ बजट ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि अपनी सेना को तेजी से आधुनिक बना रहा है। इसमें नए विमानवाहक पोत, आधुनिक युद्धपोत और स्टेल्थ लड़ाकू विमानों का विकास शामिल है। चीन इन परियोजनाओं को बहुत तेज गति से आगे बढ़ा रहा है ताकि वह वैश्विक सैन्य ताकतों के बराबर पहुंच सके।
चीन के रक्षा खर्च के आंकड़ों पर सवाल-हालांकि चीन के आधिकारिक रक्षा बजट को लेकर कई विशेषज्ञों में संदेह है। उनका मानना है कि चीन का असली सैन्य खर्च घोषित बजट से कहीं ज्यादा हो सकता है। तेजी से हो रहे हथियारों के विकास और सैन्य विस्तार को देखते हुए कई विश्लेषक चीन के आंकड़ों को पूरी तरह पारदर्शी नहीं मानते।
आर्थिक चुनौतियों के बीच चीन ने GDP लक्ष्य घटाया-चीन ने इस साल के लिए अपना जीडीपी ग्रोथ लक्ष्य 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच रखा है, जो पहले से कम है। इसके पीछे अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद, अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद बढ़ता वैश्विक संकट और घरेलू आर्थिक दबाव हैं। यह संकेत देता है कि चीन की अर्थव्यवस्था फिलहाल कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा-चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है। प्रॉपर्टी मार्केट में गिरावट, बढ़ती बेरोजगारी और धीमी आर्थिक गतिविधियां सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। पिछले तीन सालों से चीन लगभग 5 प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य रखता था, लेकिन इस बार इसे घटाकर 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच रखा गया है।
चीन का बढ़ता रक्षा बजट और तेजी से हो रहा सैन्य आधुनिकीकरण क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर असर डाल सकता है। भारत समेत पड़ोसी देशों के लिए यह एक चुनौती है, खासकर आर्थिक दबाव के बीच। वहीं, चीन की घरेलू आर्थिक चुनौतियां भी उसकी विकास यात्रा को प्रभावित कर रही हैं। आने वाले समय में चीन की नीतियों और उसकी आर्थिक स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।



