Google Analytics Meta Pixel
International

भारत की शर्त से अटका अमेरिका-भारत ट्रेड डील का मामला

भारत की शर्त से बढ़ी अमेरिका की चिंता: Trade Deal में अटका मामला, जानिए क्या है विवाद
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत में नया मोड़-भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देश अपने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है जिसने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। भारत चाहता है कि समझौते के बाद अमेरिका ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे भारत को मिलने वाले फायदे कम हों।

अमेरिका का रुख बदला टैरिफ विवाद के बाद-इस साल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दौरान लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने Trade Act 1974 की Section 301 को फिर से सक्रिय किया, जो दूसरे देशों की व्यापार नीतियों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्ति देता है। यह कानून अब भारत समेत कई देशों की नीतियों की जांच कर रहा है।

Section 301 के तहत कई देशों की जांच-अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) भारत, चीन, जापान, सिंगापुर और यूरोपीय संघ जैसे बड़े आर्थिक साझेदारों की नीतियों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका देख रहा है कि कहीं इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार हितों को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही हैं। भारत के लिए यह जांच खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कई उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

नई दिल्ली में शुरू हुआ बातचीत का नया दौर-अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में नई दिल्ली में बातचीत का नया दौर शुरू हुआ है। दोनों देश व्यापारिक मतभेद कम करने और ऐसा समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे दोनों को फायदा हो। हालांकि कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी सहमति बननी बाकी है।

भारत क्यों है Section 301 को लेकर सतर्क?-भारत चाहता है कि अगर वह अमेरिकी उत्पादों को विशेष रियायत देता है, तो अमेरिका Section 301 का इस्तेमाल कर भारतीय सामान पर नए टैरिफ न लगाए। भारत इस बात का स्पष्ट आश्वासन चाहता है ताकि भविष्य में एकतरफा फैसलों से उसे नुकसान न हो। यही वजह है कि यह मुद्दा बातचीत का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है।

Section 301 क्या है?-Trade Act 1974 की Section 301 अमेरिका को अधिकार देती है कि वह किसी देश की व्यापार नीति की जांच करे और अगर वह अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हो तो अतिरिक्त टैरिफ लगा सके या प्रतिबंध लगा सके। यह कानून कई देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

जांच की वजहें और WTO से फर्क-Section 301 के तहत जांच बौद्धिक संपदा उल्लंघन, जबरन तकनीक हस्तांतरण, बाजार तक सीमित पहुंच जैसे कारणों से हो सकती है। WTO की तुलना में यह कानून एकतरफा कार्रवाई करता है, जिससे कई देश इसे दबाव बनाने वाला मानते हैं।

ट्रंप के कार्यकाल में Section 301 की वापसी-1980 के दशक में सक्रिय यह कानून ट्रंप के कार्यकाल में चीन के खिलाफ टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल हुआ। अब पुराने टैरिफ कानूनी चुनौतियों में हैं, इसलिए अमेरिका इस कानून पर फिर भरोसा कर रहा है।

बंधुआ मजदूरी से जुड़े उत्पादों की भी जांच-अमेरिका एक बड़ी जांच चला रहा है जो बंधुआ मजदूरी से जुड़े उत्पादों और सप्लाई चेन पर केंद्रित है। यह जांच करीब 60 देशों तक फैली है और इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

भारत पर उठे सवाल और जवाब-अमेरिका का आरोप है कि भारत ने 2025 में अमेरिका के साथ 58 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष बनाया। साथ ही कई उद्योगों को सरकारी सहायता मिली है। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

भारत के लिए समझौते की अहमियत-भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है और चीन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। वह चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसे बेहतर व्यापारिक अवसर मिलें ताकि विदेशी निवेश बढ़े और निर्यात को गति मिले।

जुलाई में आ सकता है बड़ा फैसला-अमेरिका का अस्थायी 10% बेसलाइन टैरिफ जुलाई के अंत तक खत्म हो रहा है। इसलिए दोनों देशों के बीच समझौते की बातचीत तेज हो गई है। आने वाले हफ्तों में इस पर कई अहम फैसले आ सकते हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button