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‘उंगली उठाई तो उंगली काट देता’ – टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का बड़ा बयान, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव आयोग को लेकर नया विवाद: टीएमसी सांसद का चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला
चुनाव आयोग पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का आरोप-पश्चिम बंगाल की राजनीति फिर से गरमाई है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के व्यवहार पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठक में अनुचित व्यवहार किया, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल मच गई है।

‘अगर सीईसी नहीं होते तो उंगली काट देता’—कल्याण बनर्जी का विवादित बयान-कल्याण बनर्जी ने रैली में कहा कि चुनाव आयुक्त  ने मुख्यमंत्री के साथ बहुत खराब व्यवहार किया। उन्होंने इतना कहा कि अगर वह उस वक्त चुनाव आयुक्त नहीं होते तो उनकी उंगली काट देते। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया और कई दलों ने इसकी आलोचना की।

भाजपा ने टीएमसी सांसद की भाषा पर जताई नाराजगी-भाजपा के नेता और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कल्याण बनर्जी के बयान को तृणमूल कांग्रेस की सोच बताया। उन्होंने कहा कि टीएमसी को लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का कोई सम्मान नहीं है। भाजपा ने इस तरह की भाषा का कड़ा विरोध किया और इसे अनुचित बताया।

मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर उठे सवाल-कल्याण बनर्जी लंबे समय से चुनाव आयोग की मतदाता सूची की गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मनमाने तरीके से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है। यह मुद्दा राज्य की राजनीति में विवाद का बड़ा कारण बन चुका है।

लाखों नाम हटने से बढ़ा विवाद और राजनीतिक टकराव-चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी तक लगभग 63.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 8.3 प्रतिशत है। इससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई है, जो अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

ममता बनर्जी का धरना और चुनाव आयोग पर आरोप- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कोलकाता में धरना शुरू कर इसे चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप और साजिश बताया। उनका मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश है, जिससे राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव आयोग को लेकर यह विवाद गहराता जा रहा है। टीएमसी और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा आगामी चुनावों की दिशा तय कर सकता है। इस राजनीतिक टकराव पर नजर रखना अब और भी जरूरी हो गया है।

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