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बंगाल चुनाव का पहला चरण: प्रचार थमा, वादों और आरोपों के बीच सियासी जंग तेज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पहले चरण की वोटिंग से पहले सियासी माहौल गरम-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार का शोर अब थम चुका है, लेकिन राजनीतिक माहौल अभी भी काफी गर्म है। इस बार चुनाव में कई मुद्दे छाए रहे, जैसे खाने की आदतें, घुसपैठ, समान नागरिक संहिता और वोटर लिस्ट। अब सबकी नजर 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग पर टिकी है।

पहले चरण में 152 सीटों पर होगा मुकाबला-पहले चरण में उत्तर बंगाल और दक्षिण के कुछ जिलों की 152 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव आयोग के अनुसार करीब 3.60 करोड़ मतदाता वोट डालने के लिए तैयार हैं, जिनमें पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर वोटर शामिल हैं। इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा माना जा रहा है।

बीजेपी ने कानून-व्यवस्था और घुसपैठ को बनाया मुद्दा-
बीजेपी के बड़े नेताओं ने प्रचार के दौरान राज्य में बढ़ती हिंसा, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठी पार्टी वोट बैंक के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रही है। साथ ही सीमाओं की सुरक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे भी जोर-शोर से उठाए गए।

अमित शाह का दावा: बदलाव तय है-गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आखिरी भाषण में कहा कि इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन निश्चित है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका समय खत्म हो रहा है। उन्होंने लोगों से बिना डर के वोट देने की अपील भी की।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए-चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए करीब 2,450 कंपनियां केंद्रीय बलों की तैनात की हैं, जिसमें लाखों जवान शामिल हैं। 8,000 से ज्यादा बूथों को संवेदनशील माना गया है, ताकि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

टीएमसी का पलटवार: बीजेपी पर झूठे वादों का आरोप-टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने पहले भी बड़े वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुराने वादे निभा नहीं पाए, उन पर नए वादों के लिए भरोसा करना मुश्किल है।

ममता बनर्जी का भरोसा: फिर बनेगी सरकार-मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी पार्टी फिर से सत्ता में आएगी। उन्होंने बीजेपी और केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उनकी सरकार ज्यादा दिन नहीं टिकेगी। प्रधानमंत्री के बयान पर भी उन्होंने सवाल उठाए और इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया।

दोनों पार्टियों के बड़े-बड़े वादे-बीजेपी ने समान नागरिक संहिता लागू करने, घुसपैठ रोकने और रोजगार देने जैसे वादे किए हैं। वहीं टीएमसी ने हर परिवार को पक्का घर, पानी और आर्थिक सहायता बढ़ाने का भरोसा दिया है। दोनों पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं।

वोटर लिस्ट और अन्य मुद्दों पर विवाद-इस बार वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर भी विवाद हुआ है। टीएमसी ने बीजेपी पर सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। खाने की आदतों और धार्मिक मुद्दों को लेकर भी बयानबाजी हुई, जिससे चुनावी माहौल और गरम हो गया।

कई बड़े चेहरे मैदान में-पहले चरण में कई बड़े नेता चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। नंदीग्राम, दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी जैसी सीटों पर खास नजर रहेगी। इन सीटों के नतीजे आगे की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

अब जनता के फैसले का इंतजार-प्रचार खत्म हो चुका है और अब फैसला जनता के हाथ में है। 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जिसके बाद साफ होगा कि जनता किसे मौका देती है। फिलहाल सभी पार्टियां अपने दावों के साथ नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।

 

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