पुल नहीं तो सड़क जाम: अमाड़ के ग्रामीणों का गुस्सा फूटा, महिलाएं और बच्चे भी उतरे हाईवे पर

छत्तीसगढ़ के मैनपुर में पुल निर्माण को लेकर सड़कों पर उतरे ग्रामीण: जानिए पूरा मामला-छत्तीसगढ़ के मैनपुर ब्लॉक में पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। अमाड़ पंचायत के सैकड़ों लोग अपनी मांगों को लेकर नेशनल हाईवे-130 पर चक्काजाम कर बैठे हैं। इस प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस आंदोलन की वजह और हालात।
पुल तोड़ने के बाद नया पुल नहीं बना, ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ीं-ग्रामीणों का कहना है कि पहले से मौजूद रपटे पुल को तोड़ दिया गया, लेकिन नया पुल अब तक नहीं बन पाया है। बारिश का मौसम नजदीक है और लोग डर रहे हैं कि अगर जल्दी से व्यवस्था नहीं हुई तो उनका गांव पूरी तरह से कट सकता है। इस वजह से उनकी परेशानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं।
बारिश से पहले रास्ता ठीक करने की मांग जोर पकड़ रही है-ग्रामीण लगातार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बारिश शुरू होने से पहले कम से कम रास्ते को आवाजाही लायक बना दिया जाए। वे बताते हैं कि रोजाना अस्पताल जाना, बच्चों को स्कूल भेजना और अन्य जरूरी काम बहुत मुश्किल हो जाएंगे। पहले भी प्रशासन को इस बारे में बताया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल, समस्या की गंभीरता दिखा रही तस्वीर-इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्कूली बच्चे भी शामिल हुए हैं। बच्चे स्कूल की ड्रेस में हाथों में तख्तियां लेकर बैठे नजर आए। यह साफ करता है कि समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है और ग्रामीण अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं।
प्रशासन पर ग्रामीणों ने लगाया लापरवाही का आरोप-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आदिवासी इलाकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। अगर यही हाल रहा तो बारिश के दौरान खासकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अस्पताल पहुंचने में भारी दिक्कत होगी।
1.49 करोड़ की मंजूरी के बाद भी अधूरा पड़ा पुल निर्माण-जानकारी के मुताबिक, इस पुल के निर्माण के लिए 2024 में करीब 1.49 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। पीएमजीएसवाय विभाग को काम की जिम्मेदारी दी गई और ठेका एक निजी कंपनी को मिला। फरवरी में काम शुरू हुआ, लेकिन पुराने पुल को तोड़ने के बाद निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया।
अस्थायी रास्ता भी बारिश में खतरे में पड़ सकता है-फिलहाल नाले पर मिट्टी और रेत से अस्थायी रास्ता बनाया गया है, जो हल्की बारिश में भी बह सकता है। इससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि अगर अभी से इंतजाम नहीं किए गए तो बरसात में आवाजाही पूरी तरह बंद हो सकती है और हालात और खराब हो जाएंगे।
प्रशासनिक तालमेल की कमी से प्रोजेक्ट अटका हुआ है-बताया जा रहा है कि उदंती अभ्यारण्य प्रशासन से एनओसी नहीं मिलने के कारण काम रुका हुआ है। अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है, जो अब सड़क पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
हाईवे जाम से यातायात प्रभावित, ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी-ग्रामीणों के चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे-130 पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। लंबी कतारें लग गई हैं और लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे इस प्रदर्शन को जारी रखेंगे और पीछे हटने वाले नहीं हैं।



