पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत सरकार ने ईंधन सप्लाई पर कसी नजर, अमित शाह की अध्यक्षता में बनी समिति

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों पर असर की आशंका के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ईंधन की उपलब्धता पर केंद्र सरकार की हाई लेवल निगरानी-
दिल्ली समेत कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर अफवाहें फैलने लगी थीं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ी। ऐसे में सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए ईंधन की सप्लाई और वितरण व्यवस्था पर नजर रखने के लिए एक खास निगरानी तंत्र बनाया है। इसका मकसद संभावित संकट से पहले ही स्थिति को संभालना और आम जनता को परेशानी से बचाना है।
अमित शाह की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति-
सरकार ने ईंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। इस समिति में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं। यह टीम रोजाना पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता, सप्लाई नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स की समीक्षा करेगी।
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच सरकार का सतर्क कदम-
यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति बिगड़ी तो रणनीतिक रूप से अहम Strait of Hormuz से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार ने पहले से ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
सरकार का भरोसा—देश में फिलहाल कोई ईंधन कमी नहीं-
सरकारी अधिकारियों ने साफ किया है कि देश के किसी भी हिस्से में फिलहाल पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। भारत के पास पर्याप्त ईंधन भंडार और मजबूत आपूर्ति प्रणाली है। वैश्विक बाधा आने पर भी देश की व्यवस्था उसे संभालने में सक्षम है, इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
एलपीजी सप्लाई के लिए भी उठाए गए एहतियाती कदम-
रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने बुकिंग अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है। तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गैस सिलेंडर की डिलीवरी तेज करें। ज्यादातर उपभोक्ताओं को अब बुकिंग के दो-तीन दिन के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
औद्योगिक गैस सप्लाई को भी संतुलित रखा जा रहा है-सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई सामान्य खपत के लगभग 80 प्रतिशत तक मिले। इससे उद्योगों के कामकाज पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और घरेलू उपभोक्ताओं को भी गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई-दिल्ली प्रशासन ने ईंधन और एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। पुलिस और राजस्व विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे गोदामों, डिस्ट्रीब्यूटर्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की नियमित जांच करें ताकि बाजार में कृत्रिम कमी न पैदा हो और लोगों को समय पर ईंधन मिले।
गैस और ईंधन के स्टॉक की नियमित समीक्षा-सरकार तेल विपणन कंपनियों और इंड्राप्रस्था गैस लिमिटेड के साथ मिलकर नियमित रूप से ईंधन और गैस के स्टॉक की समीक्षा कर रही है। इसका उद्देश्य अस्पतालों, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई बिना रुकावट जारी रखना है।
पैनिक बाइंग रोकना सरकार की प्राथमिकता-सरकार का कहना है कि इस निगरानी तंत्र का मुख्य मकसद लोगों के बीच भरोसा बनाए रखना और पेट्रोल पंपों व गैस एजेंसियों पर घबराहट में खरीदारी को रोकना है। समिति समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थिति की जानकारी देती रहेगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव पर नजर रखेगी।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने ईंधन और गैस की सप्लाई को लेकर कड़ी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। मजबूत भंडार और सप्लाई नेटवर्क के साथ सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल कोई कमी नहीं होगी। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई से बाजार में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास जारी है।



