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रुपये पर दबाव जारी: डॉलर के मुकाबले गिरावट, तेल कीमतों और ग्लोबल हालात ने बढ़ाई टेंशन

रुपये की कमजोरी क्यों बढ़ रही है शुरुआती कारोबार में?-बुधवार को बाजार खुलते ही भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 13 पैसे गिरकर 94.81 पर आ गया। शुरुआत में रुपया 94.79 पर था, लेकिन जल्दी ही इसमें और गिरावट आई। मंगलवार को भी रुपया 53 पैसे कमजोर होकर 94.68 पर बंद हुआ था। इस लगातार गिरावट ने निवेशकों के मन में चिंता बढ़ा दी है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती का असर-विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती रुपये पर दबाव डाल रही हैं। वैश्विक बाजार में तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जो चिंता का विषय है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपया कमजोर हो रहा है।

अमेरिका-ईरान तनाव और फेडरल रिजर्व का फैसला-दुनिया भर में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर करेंसी मार्केट पर साफ दिख रहा है। साथ ही, सभी की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर टिकी है। माना जा रहा है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन फेड का रुख बाजार की दिशा तय करेगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सप्लाई की चिंता-तेल की सप्लाई के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। यही वजह है कि तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और इसका असर रुपये समेत अन्य करेंसी पर पड़ रहा है।

डॉलर इंडेक्स और बाजार की स्थिति-डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, हल्की बढ़त के साथ 98.67 पर कारोबार कर रहा है। युद्ध जैसे हालात और अनिश्चितता के कारण डॉलर को सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, जिससे इसकी मांग बनी हुई है और यह मजबूत बना हुआ है।

शेयर बाजार में हल्की तेजी, पर विदेशी निवेशक सतर्क-घरेलू शेयर बाजार में थोड़ी मजबूती देखने को मिली है। सेंसेक्स 358 अंक चढ़कर 77,245 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 101 अंक की बढ़त के साथ 24,096 पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, विदेशी निवेशकों ने 2,103 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं, जिससे बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

इंडस्ट्रियल ग्रोथ में आई कमी-देश की औद्योगिक उत्पादन दर मार्च में घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई, जो पिछले पांच महीनों में सबसे कम है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धीमी गति और बिजली क्षेत्र में कम ग्रोथ इसके मुख्य कारण हैं, जिससे आर्थिक संकेत थोड़े कमजोर नजर आ रहे हैं।

आगे का रुख कैसा हो सकता है?-विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल रुपया 93.50 से 93.80 के बीच सपोर्ट ले सकता है, जबकि ऊपर की ओर 94.50 से 94.80 का स्तर रुकावट बन सकता है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतें, वैश्विक हालात और फेडरल रिजर्व का फैसला तय करेगा कि रुपया कितना मजबूत या कमजोर होगा।

 

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