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राहुल गांधी पर बीजेपी का हमला: विदेशी रिपोर्ट को लेकर बढ़ा सियासी विवाद, इस्तीफे की मांग तेज

राहुल गांधी पर बीजेपी का बड़ा आरोप: विदेशी रिपोर्ट के सहारे भारत विरोधी ताकतों का साथ दे रहे हैं-देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद छिड़ गया है। बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह लगातार भारत विरोधी ताकतों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। यह विवाद एक अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट को लेकर शुरू हुआ, जिसने दोनों पार्टियों के बीच सियासी जंग तेज कर दी है।

बीजेपी का आरोप: राहुल गांधी भारत विरोधी ताकतों का समर्थन कर रहे हैं-बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी उन लोगों और संस्थाओं का समर्थन कर रहे हैं जो भारत की छवि खराब करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यह मामला देश की संप्रभुता और हर नागरिक के सम्मान से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

USCIRF की रिपोर्ट ने बढ़ाई सियासत की गर्माहट-
यह विवाद United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF) की रिपोर्ट को लेकर शुरू हुआ। इस रिपोर्ट में भारत की खुफिया एजेंसी RAW और संगठन RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी। इस रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

‘विदेशी रिपोर्ट पर भरोसा क्यों?’ बीजेपी ने उठाए सवाल-गौरव भाटिया ने सवाल किया कि आखिर एक विदेशी संस्था की रिपोर्ट पर इतना भरोसा क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है और भारत को किसी बाहरी संस्था से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। यह बयान सीधे राहुल गांधी को निशाना बनाकर दिया गया।

कांग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी बीजेपी ने सवाल उठाए-बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस रिपोर्ट को साझा किया है। गौरव भाटिया ने पूछा कि क्या राहुल गांधी ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह पढ़ा भी है या नहीं। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी के ऐसे मुद्दों को उठाना ठीक नहीं है।

रिपोर्ट में RAW और RSS पर कार्रवाई की सिफारिश, बीजेपी ने जताई कड़ी आपत्ति-बीजेपी नेता ने बताया कि रिपोर्ट में RAW और RSS जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, जिसे वे भारत के लिए अस्वीकार्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह देश की सुरक्षा और सम्मान के खिलाफ है।

पाकिस्तान से मिलते-जुलते बयान का आरोप-गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के बयान पाकिस्तान की भाषा से मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से RAW का विरोध करता रहा है, लेकिन अब विपक्ष के नेता भी उसी दिशा में खड़े नजर आ रहे हैं। यह बात उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया।

रिपोर्ट से जुड़े लोगों पर भी सवाल-बीजेपी ने रिपोर्ट से जुड़े अहम व्यक्ति आसिफ महमूद की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से निष्पक्ष राय की उम्मीद करना मुश्किल है, फिर भी राहुल गांधी इस रिपोर्ट का समर्थन कर रहे हैं।

RAW की तारीफ और बालाकोट स्ट्राइक का जिक्र-बीजेपी ने RAW की तारीफ करते हुए बताया कि यह एजेंसी 1968 से देश की सेवा कर रही है। बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी RAW की अहम भूमिका रही, जो इसकी क्षमता और महत्व को दर्शाता है।

राहुल गांधी के विदेशी दौरों और बयानों पर भी निशाना-बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अपने विदेशी दौरों में भी भारत के खिलाफ ऐसे बयान दिए जो इस रिपोर्ट से मेल खाते हैं। खासकर अमेरिका में उनकी मुलाकात इलहान ओमार से हुई थी, जिनके विचार भी इसी तरह के बताए जाते हैं।

अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट के आरोपों का बीजेपी ने किया खंडन-रिपोर्ट में भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के आरोप लगाए गए हैं, जिसे बीजेपी ने पूरी तरह खारिज किया। गौरव भाटिया ने कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग सुरक्षित हैं और देश की पहचान उसकी विविधता और एकता है।

भारत को ‘Country of Particular Concern’ बताने पर बीजेपी ने जताई आपत्ति-रिपोर्ट में भारत को “Country of Particular Concern” बताया गया है, जिस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

रक्षा सौदों पर रोक की सिफारिश पर विवाद-रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत को हथियारों की आपूर्ति पर रोक लगाई जाए। बीजेपी ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी चाहते हैं कि भारत कमजोर हो जाए और अपनी सुरक्षा के मामले में पीछे रह जाए।

इस्तीफे की मांग और कांग्रेस पर कड़ा निशाना-अंत में गौरव भाटिया ने राहुल गांधी से इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांगने और कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कहा कि देश को एक जिम्मेदार और परिपक्व विपक्ष के नेता की जरूरत है।

यह पूरा विवाद भारत की राजनीति में विदेशी रिपोर्टों के प्रभाव, राष्ट्रीय सुरक्षा और विपक्ष की भूमिका पर गहरी बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

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