इंदौर में गैस सिलेंडर घोटाला: छापे में खुला बड़ा खेल, 6 दिन बाद FIR और आरोपी फरार

इंदौर में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा: आरोपी फरार, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल-इंदौर में घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 मार्च को छापा पड़ा, लेकिन असली कार्रवाई छह दिन बाद हुई। इस बीच मुख्य आरोपी फरार हो गया, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
अवैध गैस गोदाम पर 12 मार्च को छापा-खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर न्यू लोहा मंडी इलाके में 12 मार्च की सुबह अवैध गैस गोदाम का पर्दाफाश किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर गोदाम को घेर लिया और वहां चल रही अवैध गतिविधियों की जांच शुरू की। यह कार्रवाई नियमों की अनदेखी और सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी थी।
66 गैस सिलेंडर और रिफिलिंग उपकरण जब्त-छापेमारी के दौरान कुल 66 गैस सिलेंडर बरामद हुए, जिनमें 24 कमर्शियल और 42 घरेलू सिलेंडर शामिल थे। जांच में पता चला कि घरेलू सिलेंडरों का गलत तरीके से व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था। साथ ही रिफिलिंग के उपकरण, इलेक्ट्रिक मोटर, तौल कांटे और एक बुलेट बाइक भी जब्त की गई, जो इस अवैध कारोबार की गंभीरता को दर्शाते हैं।
लंबे समय से चल रहा था अवैध कारोबार-अधिकारियों के मुताबिक, यह अवैध गैस सप्लाई और रिफिलिंग का काम काफी समय से चल रहा था। यह न केवल नियमों का उल्लंघन था, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक था। इतनी बड़ी मात्रा में सिलेंडरों की हेराफेरी बिना किसी बड़े नेटवर्क के संभव नहीं मानी जा रही है, जिससे पूरे मामले की जांच जरूरी हो गई है।
छापे के दौरान आरोपी फरार, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल-सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छापेमारी के वक्त मुख्य आरोपी हरिओम गुप्ता मौके से फरार हो गया। पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही और अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। गोदाम को उसी दिन सील कर दिया गया, लेकिन आरोपी का फरार होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एफआईआर दर्ज करने में छह दिन की देरी, जांच पर असर-हालांकि छापा 12 मार्च को पड़ा था, लेकिन एफआईआर 18 मार्च को दर्ज की गई। इस देरी ने प्रशासन की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुटी है, लेकिन इतनी देर से कार्रवाई शुरू होने से जांच की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ सकता है।
सप्लाई चैन की गहन जांच की तैयारी-सूत्रों के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर घरेलू गैस की कालाबाजारी किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और सप्लाई चैन की जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किस तरह से यह कारोबार संचालित हो रहा है।
प्रशासन की चेतावनी और उठते गंभीर सवाल-प्रशासन ने साफ किया है कि घरेलू गैस के गलत इस्तेमाल, अवैध भंडारण और ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि छापे के तुरंत बाद आरोपी कैसे फरार हो गया और अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी। इस पर जवाब मिलने की उम्मीद है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला न केवल गैस की कालाबाजारी का है, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।



