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Madhya Pradesh

जल गंगा संवर्धन अभियान में भोपाल संभाग में जल संरक्षण और संवर्धन के लिये चल रही हैं व्यापक गतिविधियां

भोपाल :  भोपाल संभाग के सभी जिलों में जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का शुभारंभ हो गया है। आगामी 30 जून 2026 तक चलने वाले इस अभियान के तहत संभाग के ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिये आमजन को जागरूक करने के साथ ही जल संरचनाओं की सफाई, मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य किए जा रहे हैं।

भोपाल जिले में जलशक्ति से नवभक्ति

भोपाल जिले में केरवा डैम में श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। बैरसिया विकासखंड के ग्राम पंचायत तरावली कलां में “जल शक्ति से नवभक्ति” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें माताजी के मंदिर प्रांगण में वृक्ष पूजन किया गया और जल संरक्षण की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। भोपाल नगर निगम द्वारा शहर की 22 ऐतिहासिक बावड़ियों को संरक्षित और पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है। कोलांस नदी के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

रायसेन में जन सहभागिता से हो रहे कार्य

अभियान के तहत रायसेन जिले में भी मुख्यतः जन-जागरूकता अभियान, नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण, भू-जल संर्वधन, पहले से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई, मरम्मत, जल वितरण प्रणालियों की साफ-सफाई, राजस्व रिकार्ड में जल संग्रहण संरचनाओं को अंकित करने का कार्य प्राथमिकता से कराया जा रहा है। जिले में बनाये गये जलदूतों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता अभियान में सुनिश्चित की जा रही है।

रायसेन जिले में अभियान के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत सभी सातों विकासखण्डों में 3909 निजी भवनों पर रूफवाटर हार्वेस्टिंग, 2800 शासकीय हैण्डपम्प के पास रिचार्जपिट निर्माण, शासकीय भवनों पर 950 वॉटर हार्वेस्टिंग, जल संरक्षण कार्यो की मरम्मत के 91 कार्य, जल संरक्षण के 91 कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही पूर्व से प्रगतिरत 2040 कार्यो को भी प्राथमिकता से पूर्ण कराया जाएगा। इस प्रकार जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत दस हजार 51 कार्य किए जाएंगे। इसी प्रकार वन, नगरीय प्रशासन, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी सहित अन्य विभागों द्वारा भी जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी कार्य प्राथमिकता से किए जा रहे हैं।

 विदिशा में जल गंगा संवर्धन अभियान: बहु-विभागीय समन्वय से जल संरक्षण की मजबूत पहल जलसंकट से निपटने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत विदिशा ज़िले में में व्यापक जनभागीदारी और बहु-विभागीय सहयोग के साथ प्रभावी रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शासन के विभिन्न विभागों को एक मंच पर लाकर जल संरक्षण को जनांदोलन का स्वरूप दिया गया है।अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, चेकडैम, जल संरचनाओं का निर्माण एवं मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं, वहीं नगरीय विकास विभाग शहरों में नालों की सफाई, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जल स्रोतों के संरक्षण पर कार्य कर रहा है।वन विभाग वन क्षेत्रों में जल संरचनाओं के निर्माण, भूजल संवर्धन और वन्यजीवों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुटा है। साथ ही जल संसाधन विभाग नहरों, स्टॉपडैम, बैराज और सिंचाई संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण व मरम्मत कार्यों के माध्यम से जल प्रबंधन को मजबूत बना रहा है।

कलेक्टर विदिशा श्री अंशुल गुप्ता ने बताया है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें शासन, प्रशासन और आमजन मिलकर जल संरक्षण का हिस्सा बन रहे हैं। यह समन्वित पहल न केवल वर्तमान जलसंकट का समाधान प्रस्तुत करती है, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है। विशेष रूप से बेतवा नदी के पुनर्जीवन की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जो क्षेत्रीय जल स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आंगनबाड़ियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

राजगढ़ में कलेक्टर व अधिकारी भी कर रहे श्रमदान राजगढ़ ज़िले में ग्राम तोतिपुरा, विकासखंड राजगढ़ में “जल गंगा संवर्धन अभियान” अंतर्गत बोरी बंधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने स्वयं श्रमदान किया। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया। ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन एवं पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभियान में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी मिल रही है। जिले भर में सफाई, गहरीकरण एवं जल संरचना पुनर्जीवन कार्य जारी है।सारंगपुर में कालीसिंध नदी एवं घाट में व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल उपस्थित थे। उन्होंने नदी किनारे श्रमदान कर स्वच्छता व जल संरक्षण का संदेश दिया गया।

 जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सीहोर जिले में संचालित की जा रही हैं अनेक जल संरक्षण गतिविधियां सीहोर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जनभागीदारी से कुओं, तालाबों, नदियों एवं अन्य जल स्त्रोतों की साफ सफाई एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। अभियान के तहत जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं नागरिक मिलकर श्रमदान कर रहे हैं। अभियान के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए खेत, तालाब, अमृत सरोवर, परकोलेशन टैंक, डगवेल, तालाब जीर्णोद्धार, जनभागीदारी के कार्य, कूप एवं बाउंड्री मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं। अभियान के तहत जल संरक्षण जागरूकता के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया भी किया जा रहा है।

अभियान के शुभारंभ से अब तक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले के पांचों अनुभागों में अभी तक 52 खेत तालाब पूर्ण किए गए हैं। इसी प्रकार 264 डगवेल रिचार्ज कार्य भी पूर्ण किए गए हैं। शहरी विकास अभिकरण द्वारा अमृत 2.0 योजनांतर्गत जल संग्रहण संरचना जीर्णोद्धार के 03 कार्य, नदियों में मिलने वाले नालों के शोधन के 05 कार्य, नदियों-तालाबों एवं बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त कराने संबंधी 05 कार्य, नाले नालियों की साफ-सफाई एवं सौंदर्यकरण के 32 कार्य, नगरीय निकायों वॉटर हार्वेस्टिंग स्थापना के 07 कार्य, नगरीय निकायों में हरित क्षेत्र विकास के 04 कार्य किए गए हैं। इसी प्रकार नगरीय निकायों में प्रमुख 14 स्थलों प्याउ की स्थापना की गई है। पीएचई विभाग द्वारा नल योजना के ऑपरेटरों के 18 प्रशिक्षण आयोजित किए जा चुके हैं। स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों में 137 स्थानों पर फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल परीक्षण किया गया है। जन अभियान परिषद द्वारा जल संरक्षण के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से प्रतिदिन वृक्ष एवं जल स्त्रोत पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।अभियान के अंतर्गत पुराने तालाबों, कुओं और बावड़ियों की साफ-सफाई और गहरीकरण का कार्य जनभागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है। वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत 842 खेत-तालाब, 281 नए तालाब, 204 चेक डैम और 26 स्टॉप डैम का निर्माण किया जाएगा।

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