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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: वेस्ट एशिया तनाव और महंगे क्रूड ऑयल से सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम

वेस्ट एशिया तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ा डर-वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर दिखने लगा है। सोमवार सुबह सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई, जिससे निवेशकों के मन में अनिश्चितता और डर बढ़ गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की नाजुक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।

सेंसेक्स और निफ्टी में आई बड़ी गिरावट-सोमवार के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 1,191 अंक गिरकर 72,391 के स्तर पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 349 अंकों की गिरावट के साथ 22,470 पर पहुंच गया। यह गिरावट निवेशकों के कमजोर भरोसे और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव-इस गिरावट में बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे बाजार की स्थिति और खराब हुई।

कुछ शेयरों ने दी थोड़ी राहत-हालांकि बाजार में गिरावट थी, लेकिन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कुछ शेयरों ने बढ़त दिखाकर बाजार को थोड़ा सहारा दिया। फिर भी यह तेजी समग्र गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता-वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ सकती है और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी-एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट थोड़ा सकारात्मक रहा। अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे वैश्विक बाजारों में नकारात्मक माहौल बना हुआ है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी-विदेशी निवेशक लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने 4,367 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: बाहरी कारणों से दबाव-विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट का मुख्य कारण वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। इसके अलावा, क्षेत्रीय अस्थिरता और युद्ध जैसे हालात ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है।

आगे का रुख: सतर्कता जरूरी-मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार पर दबाव बना रहेगा। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

इस तरह वेस्ट एशिया का तनाव भारतीय बाजार पर गहरा असर डाल रहा है। निवेशकों के लिए यह वक्त सावधानी से कदम बढ़ाने का है ताकि वे अनिश्चितता के बीच बेहतर फैसले ले सकें।

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