बंगाल चुनाव 2026: इन 5 हाई-प्रोफाइल सीटों पर टिकी सत्ता की असली जंग

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: 5 सीटें तय करेंगी सत्ता की दिशा-पश्चिम बंगाल में अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव का माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। 23 और 29 अप्रैल को 294 सीटों पर वोटिंग होगी, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। लेकिन इस बार चुनाव की असली लड़ाई कुछ खास सीटों पर ही केंद्रित है, जो पूरे चुनाव का रुख तय करेंगी।
नंदीग्राम: राजनीति की सबसे बड़ी टक्कर का मैदान-नंदीग्राम सीट 2021 के चुनाव में देशभर की नजरों में आई थी, जब भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दी थी। इस बार भी शुभेंदु यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनके सामने टीएमसी के पबित्र कर हैं, जो कभी उनके करीबी थे। यह मुकाबला सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि रिश्तों और भरोसे की परीक्षा भी है।
भवानीपुर: ममता बनर्जी का मजबूत किला-भवानीपुर को ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता है। 2021 में नंदीग्राम हारने के बाद उन्होंने यहां से उपचुनाव जीतकर अपनी सत्ता बचाई थी। यह क्षेत्र शहरी और मध्यवर्गीय मतदाताओं का केंद्र है, जहां ममता की पकड़ मजबूत है। भाजपा यहां सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ममता की लोकप्रियता इसे आसान नहीं बनने दे रही।
मुर्शिदाबाद: SIR और ध्रुवीकरण का असर-मुर्शिदाबाद सीट इस बार बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। यहां मुस्लिम आबादी अधिक है और मतदाता सूची से SIR के तहत नाम हटाने का मुद्दा चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना रहा है। टीएमसी, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है, जहां ध्रुवीकरण नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है।
जादवपुर: लेफ्ट और टीएमसी की पुरानी जंग-जादवपुर सीट लंबे समय से वामपंथ का गढ़ रही है, लेकिन पिछले चुनावों में टीएमसी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। इस बार फिर से टीएमसी के देबव्रत मजूमदार और सीपीएम के बिकाश रंजन भट्टाचार्य के बीच कड़ी टक्कर है। इस सीट का नतीजा वामपंथ की बंगाल में वापसी का संकेत भी दे सकता है।
खड़गपुर सदर: दिलीप घोष की प्रतिष्ठा दांव पर-खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा के बड़े नेता दिलीप घोष और टीएमसी के प्रदीप सरकार के बीच मुकाबला है। दिलीप घोष के लिए यह चुनाव अपनी साख बचाने का मौका है, जबकि टीएमसी इस सीट पर जीतकर भाजपा को बड़ा झटका देना चाहती है। यह मुकाबला भी चुनाव की दिशा तय कर सकता है।
अन्य महत्वपूर्ण सीटें और चुनावी समीकरण-इन पांच मुख्य सीटों के अलावा संदेशखली, भांगर, दिनहाटा, गायघाटा, कोलकाता पोर्ट और बालीगंज जैसी सीटें भी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन हाई-प्रोफाइल सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा तो सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ेगी, वहीं टीएमसी की पकड़ बनी रही तो ममता बनर्जी फिर से सत्ता में आ सकती हैं।
पश्चिम बंगाल की जनता की नजरें अब इन सीटों पर टिकी हैं, जो तय करेंगी कि अगले पांच साल राज्य की सत्ता किसके हाथ में होगी।



