केरल में बदलाव की आहट? मोदी की हुंकार—LDF-UDF का दौर खत्म, NDA सरकार का दावा

केरल चुनाव 2026: मोदी की एंट्री और बदलाव की उम्मीद-केरल विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण के प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरुवल्ला में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने भरोसा जताया कि दशकों से राज्य में राज कर रहे LDF और UDF का दबदबा खत्म होगा और इस बार बीजेपी-एनडीए की सरकार बनेगी। इस भाषण ने राजनीतिक माहौल में नया उत्साह पैदा कर दिया है।
‘इंसानी दीवार’ से मोदी ने दिखाया बदलाव का रंग-मोदी ने रैली में उमड़ी भारी भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि केरल में बदलाव की हवा साफ महसूस हो रही है। उन्होंने वामपंथी दलों की ‘मानव श्रृंखला’ पर तंज कसते हुए कहा कि जहां वे केवल कागजों पर चेन बनाते हैं, वहीं सड़कों पर NDA के समर्थन की इंसानी दीवार दिखी है। यह बयान उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है।
चुनाव की तारीख और नतीजों पर मोदी का बड़ा बयान–प्रधानमंत्री ने जनता को याद दिलाया कि केरल में मतदान 9 अप्रैल को होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 4 मई के दिन राज्य में पुराने कुशासन का अंत होगा। मोदी के मुताबिक, अब बदलाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और पहली बार NDA पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।
अनोप एंटनी के लिए मोदी ने मांगा समर्थन-रैली में मोदी ने NDA के तिरुवल्ला उम्मीदवार अनोप एंटनी का परिचय देते हुए उन्हें अपना भरोसेमंद साथी बताया। उन्होंने कहा कि अनोप पिछले पांच साल से उनके साथ काम कर रहे हैं और एक ईमानदार, मेहनती नेता हैं। मोदी के लिए यह एक भावनात्मक पल था जब उन्होंने केरल की जिम्मेदारी अनोप को सौंपने की बात कही।
LDF और UDF पर विकास की अनदेखी का आरोप-मोदी ने केरल की खराब सड़कों, पुलों की कमी और मेडिकल सुविधाओं की खराब स्थिति को लेकर LDF और UDF सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने विकास को नजरअंदाज किया, जबकि केंद्र की मोदी सरकार ने केरल को मिलने वाले फंड में पांच गुना बढ़ोतरी की है। यह विकास का बड़ा वादा है।
‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ से बढ़ा मोदी का आत्मविश्वास-प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में उन्होंने केरल के हजारों कार्यकर्ताओं से बातचीत की, जहां उन्हें जबरदस्त उत्साह और जोश देखने को मिला। मोदी ने कहा कि जनता अब पुरानी सरकारों से तंग आ चुकी है और ‘मोदी मॉडल’ के विकास पर भरोसा जताती दिख रही है। यह उनके लिए बड़ी ताकत है।
क्या बदलेगा केरल की राजनीति का परंपरागत समीकरण?-केरल की राजनीति परंपरागत रूप से LDF और UDF के बीच ही सीमित रही है, लेकिन इस बार BJP-NDA भी मजबूत दावेदारी लेकर सामने आई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस चुनाव में केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा या फिर पुराने समीकरण कायम रहेंगे। यह चुनाव राज्य के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है।



