राज्यसभा में बड़ा उलटफेर: AAP के 7 सांसद BJP में शामिल, केजरीवाल की पार्टी की ताकत घटी

राज्यसभा में बड़ा उलटफेर: बीजेपी में शामिल हुए ‘आप’ के 7 सांसद, जानिए पूरी कहानी-देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है जिसने राज्यसभा के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने को अब आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से बीजेपी की ताकत बढ़ी है, जबकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
चेयरमैन की मंजूरी से बदला राज्यसभा का गणित-सोमवार को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने AAP के सात सांसदों के बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी। इसके बाद राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सांसदों के नाम बीजेपी के सदस्यों की सूची में जोड़ दिए गए। यह बदलाव अब पूरी तरह वैध और औपचारिक हो चुका है, जिससे संसद के ऊपरी सदन में राजनीतिक संतुलन नई दिशा में गया है।
बीजेपी की बढ़ी ताकत, AAP की संख्या घटी-इस बदलाव के बाद राज्यसभा में बीजेपी की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जो उसे और मजबूत स्थिति में ले जाती है। वहीं, आम आदमी पार्टी की संख्या घटकर केवल तीन सांसदों तक रह गई है। यह गिरावट पार्टी के लिए बड़ा झटका है क्योंकि पहले वह राज्यसभा में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए थी। इसका असर आने वाले विधायी फैसलों पर भी पड़ सकता है।
कौन-कौन से सांसद हुए शामिल-AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सात सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने शुक्रवार को राज्यसभा चेयरमैन से अनुरोध किया था कि उन्हें बीजेपी सांसद के रूप में मान्यता दी जाए। मंजूरी मिलने के बाद ये सभी औपचारिक रूप से बीजेपी के सदस्य बन गए हैं।
AAP ने जताई आपत्ति, की सदस्यता खत्म करने की मांग-इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया और राज्यसभा चेयरमैन के सामने याचिका दायर कर इन सातों सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की। AAP सांसद संजय सिंह ने भी इन नेताओं को अयोग्य घोषित करने की मांग की। हालांकि, चेयरमैन द्वारा विलय को मंजूरी मिलने के बाद पार्टी की यह मांग कमजोर पड़ती दिख रही है।
पार्टी छोड़ने की वजह क्या बताई गई-इन सातों सांसदों ने पार्टी छोड़ने का कारण बताया कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है। उनका आरोप है कि जिस विचारधारा और ईमानदारी के वादे के साथ पार्टी की शुरुआत हुई थी, अब वह उससे दूर हो गई है। इसी वजह से उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला लिया। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।



