पेट्रोल-डीजल महंगा होने से तेल कंपनियों का घाटा घटा, फिर भी रोज 600 करोड़ का नुकसान

पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद भी तेल कंपनियों का रोजाना 600 करोड़ का नुकसान-देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि हाल ही में चार बार कीमतें बढ़ाने के बाद घाटा कम जरूर हुआ है, लेकिन कंपनियां अभी भी रोजाना करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं। इससे पहले यह नुकसान लगभग 1000 करोड़ रुपये प्रतिदिन था। यानी कीमतें बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियों को पूरी राहत नहीं मिली है।
15 मई से शुरू हुई कीमतों में बढ़ोतरी-सरकारी तेल कंपनियों ने 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी शुरू की थीं। इसके बाद चार बार दाम बढ़ाए गए और कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ चुकी हैं। सरकार और कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण यह कदम उठाना पड़ा। खासतौर पर ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ गई। लंबे समय तक दाम स्थिर रखने से घाटा बढ़ा।
LPG पर सरकार दे रही है सब्सिडी-सुजाता शर्मा ने बताया कि तेल कंपनियों के घाटे में घरेलू LPG भी शामिल है। घरेलू LPG पर सरकार सब्सिडी देती है, जिससे इसकी असली कीमत और बाजार कीमत के बीच का अंतर पूरा होता है। यह सब्सिडी आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए दी जाती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतें बढ़ने से सरकार और कंपनियों दोनों पर दबाव बढ़ा है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बाजार के हिसाब से तय होती हैं-पेट्रोल और डीजल को सरकार ने डीरगुलेटेड यानी बाजार आधारित उत्पाद घोषित किया है। इसका मतलब है कि इनके दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अन्य खर्चों के आधार पर तय होते हैं। लेकिन हाल के महीनों में कंपनियों ने बढ़ती लागत के बावजूद खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं किया, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाकर घाटा कम करने की कोशिश हो रही है।
ईरान संकट का असर भारत पर-मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ा है। युद्ध जैसी स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा उछाल आया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर देश के बाजार पर पड़ता है। तेल कंपनियां बढ़ी हुई लागत का दबाव झेल रही हैं और आम लोगों को महंगे पेट्रोल-डीजल का सामना करना पड़ रहा है।
महंगाई का असर आम जनता पर-पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, राशन, दूध और अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ रही हैं। इससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि अगर दाम नहीं बढ़ाए जाते तो घाटा और बढ़ जाता। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिलेगी या महंगाई और बढ़ेगी।



