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Chhattisgarh

ईद से पहले वक्फ बोर्ड की अपील, खुले में कुरबानी और सोशल मीडिया पोस्ट से बचें

ईद से पहले वक्फ बोर्ड की अपील, खुले में कुरबानी और सोशल मीडिया पोस्ट से बचें-छत्तीसगढ़ में ईद-उल-अज़हा की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम समाज से शांति और भाईचारे का संदेश देते हुए अपील की है कि त्योहार को जिम्मेदारी से मनाएं। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने कहा कि खुले में कुरबानी न करें और सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े फोटो-वीडियो शेयर करने से बचें। उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी लापरवाहियां सामाजिक माहौल को बिगाड़ सकती हैं, इसलिए सभी को सतर्क रहना जरूरी है।

28 मई को मनाया जाएगा ईद-उल-अज़हा-डॉ. सलीम राज ने बताया कि इस साल 28 मई को पूरे प्रदेश में ईद-उल-अज़हा मनाई जाएगी। मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक अलग-अलग समय पर नमाज होगी। नमाज के बाद लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद देंगे और त्योहार की खुशियां बांटेंगे। यह पर्व हज़रत इब्राहीम और हज़रत इस्माईल की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। साहिबे निसाब मुस्लिम 28 मई से 30 मई तक कुरबानी की रस्म पूरी करते हैं।

इस्लाम अमन और भाईचारे का संदेश देता है-डॉ. सलीम राज ने कहा कि इस्लाम धर्म हमेशा अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है। पैगंबर साहब ने भी सिखाया है कि जिस देश में रहते हैं, वहां के कानून और समाज की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है। कुरआन और हदीस में भी प्रेम और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया गया है। त्योहार सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्यार और इंसानियत बढ़ाने का मौका है। इसलिए किसी भी काम से दूसरों की भावनाएं आहत न हों।

खुले में कुरबानी और सोशल मीडिया पोस्ट से बचें-वक्फ बोर्ड ने खासतौर पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक जगहों पर सावधानी बरतने को कहा है। कई बार लोग खुले में कुरबानी करते हैं या फोटो-वीडियो शेयर कर देते हैं, जिससे दूसरे समाज की भावनाएं आहत होती हैं और माहौल खराब हो सकता है। इसलिए बोर्ड ने अपील की है कि सार्वजनिक जगहों पर कुरबानी न करें और इंटरनेट पर तस्वीरें या वीडियो न डालें। साथ ही प्रतिबंधित पशुओं की कुरबानी न करने और कानून का पालन करने की सलाह दी गई है।

साफ-सफाई और नमाज को लेकर दिशा-निर्देश-वक्फ बोर्ड ने साफ-सफाई को लेकर भी निर्देश दिए हैं। कुरबानी के बाद खून नालियों में न बहाएं और अपशिष्ट पदार्थों को सही तरीके से दफनाएं ताकि आसपास साफ-सुथरा रहे। नमाज के लिए भी कहा गया है कि सड़क पर नमाज न अदा करें। भीड़ होने पर अलग-अलग पालियों में नमाज की व्यवस्था करें। बोर्ड ने कहा कि त्योहार प्रेम, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है, इसलिए इसे शांति और भाईचारे के साथ मनाएं।

 

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