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Politics

4 विधायकों के इस्तीफे पर तमिलनाडु में बवाल, AIADMK सांसद ने मांगी CBI जांच

तमिलनाडु में सियासी तूफान: AIADMK सांसद ने 4 विधायकों के इस्तीफे पर CBI जांच की मांग की-तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। AIADMK के सांसद M धनपाल ने अपनी ही पार्टी के चार विधायकों के अचानक इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ DMK में शामिल होने के मामले में CBI जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन इस्तीफों के पीछे भारी पैसों का लेन-देन हुआ है। ये चारों विधायक हाल ही में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन शपथ लेने के कुछ ही समय बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इस घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

AIADMK सांसद ने लगाए गंभीर आरोप-M धनपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि चार विधायकों के इस्तीफे और तुरंत DMK में शामिल होने के पीछे की सच्चाई सामने आनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि इसके पीछे भारी रकम का लेन-देन हुआ है। धनपाल ने केंद्र सरकार से इस मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी मामले की जांच करने को कहा है ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके।

किन विधायकों ने छोड़ी पार्टी?-इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब K Maragatham Kumaravel, S Jayakumar, P Sathyabama और Esakki Subaya ने विधायक पद से इस्तीफा देकर DMK का दामन थाम लिया। इनके पार्टी छोड़ने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बहस तेज हो गई। विपक्ष का कहना है कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला बता रहा है। इस कदम ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

विधानसभा में बहुमत को लेकर बढ़ी चर्चा-AIADMK सांसद का आरोप है कि DMK के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं था, इसलिए उन्होंने दूसरी पार्टियों के विधायकों को अपने पक्ष में किया। उन्होंने दावा किया कि AIADMK को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य में सरकार की रणनीति और विपक्ष की एकजुटता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाएगा।

AIADMK में फिर दिखी एकजुटता-इस विवाद के बीच AIADMK के अंदर भी बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। पार्टी के बागी गुट ने फिर से एकजुटता दिखाई और Edappadi K Palaniswami के नेतृत्व को स्वीकार कर लिया। खबर है कि बागी विधायक 27 मई को पलानीस्वामी के आवास पहुंचे और अपना समर्थन दिया। इसके बाद पार्टी ने खुद को “मजबूत और एकजुट ताकत” बताने की कोशिश की है, ताकि विपक्षी दलों को जवाब दिया जा सके।

विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल-इस पूरे मामले पर अन्य विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। Communist Party of India (Marxist) और Viduthalai Chiruthaigal Katchi ने इस घटनाक्रम को स्वस्थ राजनीति के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि चुनाव जीतने के तुरंत बाद दल बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या केंद्र सरकार इस मामले में जांच एजेंसियों को कार्रवाई करने की अनुमति देगी या नहीं।

 

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