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हॉर्मुज संकट से तेल बाजार में उथल-पुथल, क्या भारत में फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के चलते वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल देखने को मिला है। हाल ही में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सवाल ये है कि क्या भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम फिर से बढ़ेंगे?

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी-मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ते ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। ब्रेंट क्रूड सितंबर फ्यूचर करीब 3.24 प्रतिशत बढ़कर 78.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 3.30 प्रतिशत बढ़कर 73.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भले ही यह बढ़ोतरी तीन प्रतिशत से कम लगे, लेकिन तेल बाजार में यह काफी बड़ा बदलाव माना जाता है। तेल की कीमत बढ़ने से सिर्फ ईंधन महंगा नहीं होता, बल्कि इसका असर परिवहन, उद्योग और आम जनता की जेब पर भी पड़ता है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी चिंता-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने भी कतर और यूएई की ओर सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। इस वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो तेल निर्यात करने वाले देशों से सप्लाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही इस मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर बड़ा असर पड़ेगा।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है पूरी दुनिया के लिए इतना अहम?-स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुज़रता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। इसलिए इस इलाके में कोई भी सैन्य गतिविधि सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती है। अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहा तो कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही में कमी, बढ़ी वैश्विक चिंता-अमेरिका का कहना है कि इस समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ईरान ने दावा किया है कि उसने प्रतिबंधित क्षेत्र में एक जहाज पर कार्रवाई की है, जिससे इस मार्ग पर असर पड़ा है। शिप ट्रैकिंग कंपनी केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को इस रास्ते से केवल छह जहाज गुजरे, जो पिछले पांच हफ्तों में सबसे कम दैनिक ट्रैफिक है। यह साफ संकेत है कि क्षेत्र में तनाव का असर समुद्री व्यापार पर पड़ना शुरू हो चुका है।

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?-भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं। पहले भी युद्ध जैसे हालात में ईंधन की कीमतों में तेजी देखी गई है। भारत के पास रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से तेल खरीदने का विकल्प है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और भू-राजनीतिक कारणों से यह विकल्प पूरी तरह आसान नहीं है। आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा मिडिल ईस्ट के हालात पर निर्भर करेगी।

 

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