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Politics

डी राजा की पहल से वामपंथी दलों में फिर से एकता की उम्मीद

वामपंथ को फिर से मजबूत करने की कोशिश: डी राजा ने सभी लेफ्ट पार्टियों को लिखा पत्र, एकजुटता पर दिया जोर
वामपंथी दलों की एकता के लिए डी राजा की पहल-देश की राजनीति में वामपंथी पार्टियों की भूमिका को फिर से मजबूत करने की कोशिशें तेज हो रही हैं। CPI महासचिव डी राजा ने सभी प्रमुख वामपंथी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर जल्द बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में सभी दलों को मिलकर रणनीति बनानी चाहिए ताकि जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत हो सके।

लंबे समय बाद वामपंथी दलों की बैठक की जरूरत-पिछले एक साल से वामपंथी दलों की कोई बड़ी बैठक नहीं हुई है। हालांकि कुछ संयुक्त बयान आए, लेकिन वे ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक सीमित रहे। डी राजा ने खुद पहल करते हुए जून के पहले सप्ताह में बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा है ताकि साझा रणनीति पर चर्चा हो सके।

संवाद की कमी से बढ़ी चिंता-CPI का मानना है कि वामपंथी दलों के बीच लगातार संवाद न होने से संघर्ष कमजोर हुआ है। अलग-अलग काम करने की बजाय सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। इसलिए CPI ने पहल की और सभी सहयोगी दलों से बातचीत के लिए आगे आने को कहा है।

पहले शीर्ष नेताओं की बैठक का सुझाव-CPI(M) ने सुझाव दिया है कि पहले CPI(M), CPI और CPI(ML) लिबरेशन के महासचिवों की बैठक हो। इसके बाद सभी वामपंथी दलों की व्यापक बैठक हो सकती है। यह बैठक इसी सप्ताह हो सकती है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

प्रमुख नेताओं को भेजा गया पत्र-डी राजा ने CPI(M) के एम. ए. बेबी, CPI(ML) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य, फॉरवर्ड ब्लॉक के जी देवराजन और आरएसपी के मनोज भट्टाचार्य को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक हालात में यह चर्चा जरूरी है और सभी दलों से सामूहिक रणनीति बनाने की अपील की है।

चुनावी हार और युवाओं तक पहुंच की चिंता-डी राजा ने हाल के चुनावों में वामपंथी दलों को मिली हार और युवाओं को जोड़ने में कठिनाइयों पर चिंता जताई है। बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता से प्रभावित युवा वर्ग को जोड़ने के लिए नई रणनीति बनानी होगी।

जनता को मजबूत विकल्प देने की चुनौती-डी राजा ने कहा कि आम जनता कई समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन वामपंथी दल खुद को मजबूत लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में स्थापित नहीं कर पाए हैं। इसे बदलने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर काम करना होगा।

जन आंदोलनों की कमी पर चिंता-पिछले कुछ वर्षों में बड़े जन आंदोलनों की संख्या कम हुई है। जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष वामपंथ की पहचान रहा है। जन आंदोलनों की कमजोरी पर गंभीर चर्चा जरूरी है ताकि संगठन की सक्रियता और भरोसा बढ़ाया जा सके।

एकजुट और विश्वसनीय विकल्प बनने पर जोर-डी राजा ने कहा कि वामपंथी दलों को एकजुट होकर साझा एजेंडा और स्पष्ट दिशा तय करनी होगी। तभी वे जनता के बीच विश्वसनीय विकल्प बन पाएंगे और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा पाएंगे।

भविष्य की रणनीति पर मंथन होगा-डी राजा ने सभी नेताओं से आग्रह किया है कि वे मिलकर मौजूदा हालात पर चर्चा करें और आगे की राह तय करें। सामूहिक प्रयासों से ही वामपंथी आंदोलन को नई ऊर्जा मिल सकती है और वे फिर से मजबूत ताकत बन सकते हैं।

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